UPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर NATO का नाम आता है। NATO यानी North Atlantic Treaty Organization एक सैन्य गठबंधन है, जो सदस्य देशों की सुरक्षा और सामूहिक रक्षा(Collective Defence) सुनिश्चित करता है। UPSC के दृष्टिकोण से, नाटो को समझना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अंतर्राष्ट्रीय संबंधों और भारत की विदेश नीति में एक अहम भूमिका निभाता है।
पृष्ठभूमि/इतिहास (Background/History):
नाटो की स्थापना 4 अप्रैल 1949 को हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य शीत युद्ध (Cold War) के दौरान सोवियत संघ (Soviet Union) के विस्तार को रोकना था। उस समय पश्चिमी देशों ने मिलकर एक सैन्य गठबंधन बनाया ताकि अगर किसी एक देश पर हमला हुआ तो सभी सदस्य मिलकर जवाब दें।
शुरुआत में NATO के 12 founding members थे, जिनमें USA, Canada, United Kingdom, France, Italy, Belgium, Netherlands, Luxembourg, Norway, Denmark, Portugal और Iceland शामिल थे। अब 2025 तक NATO के कुल 32 सदस्य देश हैं, जिनमें हाल ही में Finland और Sweden भी शामिल हुए हैं।

कार्य प्रणाली (Working Mechanism):
NATO के सदस्य वर्तमान में(2025 तक) 32 देश हैं। मुख्य सिद्धांत है Article 5: यदि कोई देश NATO के किसी सदस्य देश पर हमला करता है, तो बाकि सभी सदस्य मिलकर उसे हराने के लिए सामूहिक कार्रवाई करते हैं।
NATO का काम करने का तरीका:
- सैन्य अभ्यास(Joint Military Exercises)– सभी सदस्य देशों की सेनाएँ एक साथ सैन्य प्रशिक्षण करती हैं।
- खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान(Intelligence Sharing)– खतरे को जल्दी समझने और रोकने के लिए।
- सामूहिक रक्षा(Collective Defence)– Article 5 के तहत किसी एक सदस्य पर हमला होने पर बाकी सभी सदस्य सक्रिय हो जाते हैं।
NATO का निर्णय लेने का तरीका Consensus(सहमति) पर आधारित है, यानी सभी सदस्य देशों को निर्णय पर सहमति देना जरूरी है।
NATO का महत्व और वैश्विक भूमिका:
नाटो का महत्व कई दृष्टियों से है:-
- Russian containment: शीत युद्ध के दौरान और आज भी रूस के विस्तार को रोकने में NATO का प्रमुख योगदान है।
- यूरोप की सुरक्षा: यूरोप में शांति और स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है।
- संकट प्रतिक्रिया: Balkans और Afghanistan जैसी जगहों पर NATO की तैनाती और मिशन।
आज के समय में नाटो केवल यूरोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक सुरक्षा और रणनीतिक निर्णयों में भी अहम भूमिका निभाता है। लेकिन इसके वैश्विक प्रभाव में उतार-चढ़ाव देखे गए हैं। उदाहरण के लिए, Donald Trump के राष्ट्रपति कार्यकाल में अमेरिका ने कई ऐसे फैसले लिए, जिन्होंने NATO के सामूहिक प्रभाव को चुनौती दी।
भारत का दृष्टिकोण (India’s Angle):
भारत नाटो का सदस्य नहीं है, लेकिन Strategic Partner और Dialogue Partner के रूप में जुड़ा हुआ है। इसका मतलब यह है कि भारत सीधे NATO की Military Alliance ka हिस्सा नहीं है, लेकिन विभिन्न मुद्दों पर नाटो के साथ सहयोग करता है। जैसे:
- Defence & Security Cooperation:- India और NATO देशों के बीच Training, exercises और knowledge sharing होती है। Terrorism, Cyber Security और Peacekeeping Missions में India का योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है।
- Indo-Pacific Region में बढ़ती भूमिका:- नाटो अब केवल Europe तक सीमित नहीं है, बल्कि Indo-Pacific में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। यह भारत के लिए एक अवसर है क्योंकि NATO देशों के साथ Collaboration से India का regional influence बढ़ सकता है। लेकिन यह एक चुनौती भी है, क्योंकि NATO की गतिविधियाँ चीन और रूस जैसी शक्तियों के साथ हमारे strategic balance को impact कर सकती हैं।
- Global Security & Counter-Terrorism में योगदान:- भारत को नाटो के साथ सहयोग से अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी भूमिका मजबूत करने का मौका मिलता है। जैसे Afghanistan और Middle East के मामलों में India का Perspective और Contributions, NATO dialogues में शामिल होते हैं।
वर्तमान प्रासंगिकता (Current Relevance):
Russia-Ukraine युद्ध के बाद नाटो की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। इस युद्ध ने यूरोप की सुरक्षा और वैश्विक शक्ति संतुलन(Global Power Balance) को चुनौती दी। जैसे:
Troop Deployment & Military Exercises:
- Eastern Europe में NATO ने अपने सैनिकों की तैनाती बढ़ाई, खासकर Poland, Baltic States और Romania में।
- नियमित joint military exercises आयोजित की जा रही हैं ताकि किसी भी संभावित खतरे का सामना किया जा सके।
Defence Cooperation:
- सदस्य देशों के बीच हथियार, intelligence और technology sharing बढ़ गई।
- यह सुनिश्चित करता है कि NATO संयुक्त रूप से किसी भी संकट का जवाब दे सके।
Sanctions Coordination:
- नाटो के सदस्य देशों ने रूस और अन्य देशों के खिलाफ आर्थिक और सैन्य प्रतिबंधों में सहयोग किया।
- यह दिखाता है कि नाटो केवल सैनिक गठबंधन नहीं, बल्कि वैश्विक रणनीतिक निर्णयों में एक key player भी है।
UPSC aspirants के लिए NATO को समझना बेहद जरूरी है। यह संगठन वैश्विक सुरक्षा और Indo-Pacific क्षेत्र में रणनीतिक भूमिका निभाता है। भारत और अन्य वैश्विक खिलाड़ी NATO को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कारक के रूप में देखते हैं। भविष्य में NATO की गतिविधियाँ वैश्विक राजनीति में बड़े बदलाव ला सकती हैं।
वैश्विक राजनीतिक गठबंधनों और Alliances को समझने के लिए इतिहास की पृष्ठभूमि भी जानना जरूरी है। जैसे कि हमारे [Age of Discovery] ब्लॉग में बताया गया है, 15वीं और 16वीं सदी में यूरोपीय देशों ने समुद्री खोजों और उपनिवेशीकरण के जरिए दुनिया के नक्शे को बदल दिया। उसी तरह, आज NATO जैसे Alliances आधुनिक वैश्विक राजनीति में देशों के सामूहिक सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन को प्रभावित करते हैं। इतिहास और वर्तमान के बीच यह कड़ी हमें यह समझने में मदद करती है कि किस तरह Geopolitical Dynamics समय के साथ विकसित होते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ’s):
Q1: नाटो क्या काम करता है?
A: नाटो एक सैन्य गठबंधन है जो सदस्य देशों की सामूहिक रक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
Q2: नाटो के कितने देश हैं?
A: 2025 तक 32 सदस्य देश।
Q3: क्या भारत नाटो का हिस्सा है?
A: नहीं, भारत केवल Strategic Partner है।
Q4: नाटो का मुख्यालय कहाँ है?
A: Brussels, Belgium
Q5: पहला नाटो देश कौन था?
A: Founding Members: USA, Canada और Western Europe के 10 देश।
Q6: नाटो में शामिल होने के क्या लाभ हैं?
A: Collective Defence, Military Cooperation, Intelligence Sharing और Security.
Q7: नाटो में कौन सा देश सबसे मजबूत है?
A: USA
Q8: अगर कोई नाटो देश पर हमला करता है तो क्या होता है?
A: Article 5 के तहत सभी सदस्य मिलकर हमला करने वाले के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई करते हैं।
Q9: नाटो का 32वां देश कौन है?
A: स्वीडन
Q10: क्या भारत NATO Plus का सदस्य है?
A: नहीं, केवल Strategic Partner