India Nepal Relations: दोस्ती, मतभेद और भविष्य की दिशा।

सदियों से भारत और नेपाल के रिश्ते दोस्ती, सहयोग और साझा सांस्कृतिक विरासत की मिसाल रहे हैं। दोनों देशों ने इतिहास में कई बार एक-दूसरे का साथ दिया है, लेकिन समय-समय पर सीमा विवाद, नदियों पर असहमति और राजनीतिक अस्थिरता ने इन रिश्तों को चुनौती भी दी है। सितम्बर 2025 में, नेपाल में नौजवानों के विरोध प्रदर्शन ने जो मौजूदा सरकार को उखाड़ फेंका है, उसने भारत और नेपाल के सामरिक और आर्थिक संबंधों पर असर डाला है।

India Nepal संबंधों का ऐतिहासिक दृष्टिकोण:

India Nepal के रिश्ते सदियों पुराने हैं और इसे अक्सर “रोटी और बेटी का रिश्ता” कहा जाता है, यानी दोनों देशों के बीच आपसी सुरक्षा, सम्मान और भरोसे का गहरा संबंध।

  • पृथ्वी नारायण शाह ने 18वीं सदी में विभिन्न खंडित मल्ल राज्यों को एकजुट करके आधुनिक नेपाल राज्य की नींव रखी। 1768 में उन्होंने राजधानी स्थानांतरण किया और गोरखा से काठमांडू को नया राजनीतिक केंद्र बनाया। नेपाल का एकीकरण मुख्य रूप से आंतरिक शक्ति संघर्ष और राजनीतिक स्थिरता लाने के उद्देश्य से था।
  • 1816 में सुगौली की संधि के तहत नेपाल और ब्रिटिश इंडिया के बीच सीमा रेखाएँ तय हुईं, जिसमें नेपाल और ब्रिटिश इंडिया के बीच काली नदी को पश्चिमी सीमा के रूप में तय किया गया था।
  • नेपाल ने ब्रिटिश इंडिया के साथ गुरखा सैनिकों की सेवा दी, जो दोनों देशों के सामरिक सहयोग का उदाहरण है।
  • स्वतंत्रता के बाद, India Nepal के बीच 1950 में Treaty of Peace and Friendship हुई, जिसमें दोनों देशों के नागरिकों को सीमाएँ पार करने, काम करने, व्यापार करने व संपत्ति खरीदने आदि में विशेष अधिकार प्राप्त हैं।

India Nepal के बीच प्रमुख विवाद:

हालाँकि भारत और नेपाल के रिश्ते ऐतिहासिक रूप से गहरे और मैत्रीपूर्ण रहे हैं, लेकिन समय-समय पर सीमा, जल संसाधन और कूटनीति से जुड़े विवाद इन संबंधों को चुनौती देते रहे हैं जैसे:

Kalapani border dispute map showing India, Nepal, and China.
Kalapani trijunction ka disputed area, jahan India, Nepal aur China milte hain.

भारत–नेपाल सीमा विवाद:

India Nepal के बीच लगभग 1,751 किलोमीटर लंबी खुली सीमा (Open Border) है। इस सीमा पर लोग बिना वीजा और पासपोर्ट के आ जा सकते हैं। लेकिन इस मैत्रीपूर्ण व्यवस्था के बावजूद कई इलाकों पर विवाद बने हुए हैं।

मुख्य विवादित क्षेत्र:

  1. कालापानी–लिपुलेख–लिम्पियाधुरा (उत्तराखंड)– विवाद की जड़ महाकाली नदी(काली नदी) का उद्गम स्थल है। भारत मानता है कि काली नदी का उद्गम कालापानी है, जबकि नेपाल इसे लिम्पियाधुरा बताता है।2020 में नेपाल ने नया राजनीतिक नक्शा जारी किया जिसमें इन क्षेत्रों को अपने हिस्से के रूप में दिखाया।
  2. सुस्ता(बिहार-नेपाल सीमा)- सुस्ता भी नेपाल और भारत के बीच एक विवादित क्षेत्र है। नेपाल इसे अपने लुम्बिनी प्रांत के पश्चिम नवलपरासी जिले के अंतर्गत सुस्ता ग्रामीण नगरपालिका का हिस्सा मानता है। भारत इसे बिहार के पश्चिम चंपारण जिले का हिस्सा बताता है। विवादित क्षेत्र गंडक नदी (नेपाल में नारायणी नदी) के पूर्वी किनारे पर स्थित है।

सामरिक महत्व:- लिपुलेख दर्रा भारत, नेपाल और चीन(तिब्बत) की तिहरी सीमा के पास है। यह क्षेत्र भारत की सड़क परियोजनाओं और तीर्थयात्रा मार्ग(कैलाश–मानसरोवर) के लिए अहम है। यही कारण है कि इस विवाद का असर सीधे भारत-नेपाल-चीन त्रिकोणीय संबंधों पर पड़ता है।

प्रमुख विवाद और समझौते:

India Nepal के रिश्तों में नदियों का मुद्दा हमेशा संवेदनशील रहा है। नेपाल की लगभग 6,000 नदियाँ और जलधाराएँ भारत में प्रवेश करती हैं और गंगा बेसिन का हिस्सा बनती हैं। इस कारण जल बंटवारा, बाढ़ प्रबंधन और हाइड्रो-पावर प्रोजेक्ट्स अक्सर विवाद का कारण बने हैं।

  • कोसी नदी समझौता(1954)- इसका उद्देश्य बिहार में आने वाली बाढ़ से राहत और कोसी बैराज का निर्माण था, पर नेपाल का मानना है कि इस समझौते में उसे अपेक्षित लाभ और नियंत्रण नहीं मिला।
  • गंडक(नारायणी) नदी समझौता(1959)- इसका उद्देश्य सिंचाई और बिजली उत्पादन करना था पर नेपाल का आरोप है कि भारत ने इस परियोजना से ज्यादा फायदा उठाया जबकि नेपाल को सीमित लाभ मिला।
  • महाकाली(काली) नदी संधि(1996)- इसमें तीन बड़े प्रोजेक्ट शामिल थे- पंचेश्वर मल्टी पर्पज, शारदा बैराज और टनकपुर बैराज। पर ये आज तक ठप है क्योंकि दोनों देशों में बिजली बंटवारे और निवेश पर सहमति नहीं बन पाई।

मौसमी और मानवीय असर- नेपाल की नदियों से आने वाली बाढ़ का सबसे ज्यादा असर बिहार और उत्तर प्रदेश पर पड़ता है। नेपाल मानता है कि भारत दबाव डालकर नदी परियोजनाओं को अपने पक्ष में मोड़ना चाहता है, जबकि भारत कहता है कि नेपाल सहयोग नहीं करता। जल विवाद सिर्फ पानी के बंटवारे तक सीमित नहीं, बल्कि यह ऊर्जा उत्पादन, कृषि सिंचाई और मानव सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है।

राजनीतिक और कूटनीतिक मतभेद:

India Nepal के बीच राजनीतिक संबंध हमेशा मित्रता और मतभेद के बीच झूलते रहे हैं। नेपाल की आंतरिक राजनीति और बाहरी दबाव(विशेषकर चीन) ने इन रिश्तों को कई बार प्रभावित किया है।

नेपाल की घरेलू राजनीति:

  • नेपाल का राजनीतिक ढांचा कई बार बदल चुका है- राजतंत्र से लोकतंत्र और फिर संघीय गणराज्य तक।
  • नेपाल की अलग-अलग सरकारें कभी भारत-समर्थक रहीं, तो कभी भारत-विरोधी रुख अपनाती रहीं।
  • कई बार नेपाल की राजनीतिक पार्टियों ने भारत-विरोधी भावनाओं को घरेलू राजनीति में वोट-बैंक के लिए इस्तेमाल किया।

चीन का प्रभाव:

  • पिछले दो दशकों में नेपाल ने चीन के साथ आर्थिक और रणनीतिक सहयोग बढ़ाया है।
  • चीन की Belt and Road Initiative(BRI) परियोजनाओं में नेपाल की भागीदारी ने भारत की चिंताओं को बढ़ाया।
  • भारत मानता है कि नेपाल को चीन से संतुलित दूरी रखनी चाहिए, वरना क्षेत्रीय सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

कूटनीतिक विवाद:

  • 2015 की नेपाल नाकेबंदी (जब नेपाल ने भारत पर आर्थिक नाकेबंदी का आरोप लगाया) से दोनों देशों के संबंधों में गहरी खटास आई।
  • 2020 का नक्शा विवाद- जब नेपाल ने कालापानी–लिपुलेख–लिम्पियाधुरा को अपने क्षेत्र में दिखाया, तब वो संबंधों में तनाव का बड़ा कारण बना।

राजनीतिक और कूटनीतिक मतभेद दिखाते हैं कि भारत–नेपाल संबंध सिर्फ भूगोल से नहीं, बल्कि नेतृत्व, नीतियों और बाहरी शक्तियों से भी गहराई से प्रभावित होते हैं।

India और Nepal की दोस्ती सिर्फ राजनैतिक नहीं, बल्कि लोगों और संस्कृति के माध्यम से भी गहरी है।

India Nepal संबंधों का आर्थिक और सांस्कृतिक पहलू:

India Nepal के बीच रिश्ते केवल राजनीति और सीमा विवाद तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सामाजिक रिश्ते भी उतने ही मजबूत हैं।

आर्थिक सहयोग:

  • भारत, नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और निवेशक है।
  • नेपाल के कुल विदेशी व्यापार का लगभग दो-तिहाई भारत के साथ होता है।
  • पेट्रोलियम उत्पाद, खाद्य सामग्री और दवाइयाँ भारत से नेपाल को निर्यात की जाती हैं, जबकि नेपाल से भारत में मुख्य रूप से तेलहन, साबुन और हस्तशिल्प आते हैं।
  • भारत ने नेपाल में कई हाइड्रोपावर, सड़क और स्वास्थ्य परियोजनाओं में निवेश किया है।

श्रमिक और प्रवासी संबंध:

  • लाखों नेपाली नागरिक भारत में कामकाज, शिक्षा और व्यापार के लिए रहते हैं।
  • भारतीय सेना में गोरखा रेजीमेंट के सैनिक नेपाली नागरिक भी हैं, जो दोनों देशों के बीच सुरक्षा और भाईचारे का प्रतीक हैं।

सांस्कृतिक और धार्मिक संबंध:

  • भारत और नेपाल दोनों हिंदू और बौद्ध संस्कृति से गहराई से जुड़े हैं।
  • पशुपतिनाथ(काठमांडू) और वाराणसी जैसे धार्मिक स्थल दोनों देशों के तीर्थयात्रियों को जोड़ते हैं।
  • “रोटी-बेटी का रिश्ता” केवल एक कहावत नहीं, बल्कि वास्तविकता है- हजारों परिवारों के वैवाहिक संबंध दोनों देशों की सीमाओं को लांघ जाते हैं।

आर्थिक और सांस्कृतिक जुड़ाव यह साबित करता है कि India Nepal संबंध केवल भू-राजनीति नहीं, बल्कि जन-जन के रिश्तों से भी मजबूत बने हैं।

भारत–नेपाल संबंधों का भविष्य और संभावनाएँ:

भारत और नेपाल के रिश्तों में चाहे विवाद और मतभेद मौजूद हों, लेकिन दोनों देशों के पास भविष्य को और बेहतर बनाने के बड़े अवसर हैं।

सहयोग की संभावनाएँ:

  • आर्थिक क्षेत्र: अगर दोनों देश मिलकर हाइड्रोपावर, ट्रेड और इंफ्रास्ट्रक्चर में साझेदारी बढ़ाएँ तो क्षेत्रीय विकास को नई गति मिल सकती है।
  • सांस्कृतिक और शैक्षिक आदान-प्रदान: युवाओं और विद्यार्थियों के बीच संबंध मजबूत कर, “रोटी-बेटी” वाला रिश्ता और गहरा हो सकता है।
  • सुरक्षा और रणनीति: खुली सीमा का दुरुपयोग न हो, इसके लिए संयुक्त सुरक्षा व्यवस्था दोनों देशों के लिए जरूरी है।

चुनौतियाँ:

  • नेपाल की घरेलू राजनीति में बार-बार होने वाले बदलाव भारत के साथ स्थिर नीति बनाने में बाधा डालते हैं।
  • चीन का बढ़ता प्रभाव नेपाल को रणनीतिक रूप से भारत से दूर कर सकता है।
  • सीमा विवाद तब तक हल नहीं होंगे, जब तक दोनों देश संवाद और पारदर्शिता से आगे नहीं बढ़ते।

आगे की राह:

  • दोनों देशों को चाहिए कि वे विवादों के बजाय साझेदारी और विश्वास पर ध्यान दें।
  • 21वीं सदी में भारत–नेपाल संबंध केवल सीमा और राजनीति तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि इन्हें आर्थिक सहयोग, सांस्कृतिक जुड़ाव और क्षेत्रीय शांति का आधार बनना चाहिए।

भारत–नेपाल संबंधों का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि दोनों देश मतभेदों को संवाद से हल कर, विश्वास और साझेदारी को कितना मजबूत बनाते हैं।

India Nepal के रिश्ते इतिहास, संस्कृति और भूगोल से इतने गहरे जुड़े हैं कि इन्हें केवल सीमा विवाद या राजनीतिक मतभेद से परिभाषित नहीं किया जा सकता। “रोटी-बेटी का रिश्ता” दिखाता है कि दोनों देशों के बीच संबंध केवल सरकारों तक सीमित नहीं, बल्कि जन-जन के स्तर पर भी मजबूत हैं।

हालाँकि, सीमा विवाद, जल संसाधन और राजनीतिक मतभेद जैसी चुनौतियाँ सामने आती रहती हैं, लेकिन संवाद, विश्वास और सहयोग के जरिये भारत और नेपाल अपने संबंधों को और भी मजबूत बना सकते हैं। आने वाले समय में ये रिश्ते न सिर्फ दोनों देशों के लिए, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता और विकास के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।

आज India Nepal संबंधों को समझने के लिए हमें यह भी जानना जरूरी है कि वैश्विक राजनीति की जड़ें कैसे बनीं। 15वीं–17वीं सदी का Age of Discovery इसी Geopolitics का शुरुआती दौर था, जिसने आधुनिक अंतरराष्ट्रीय रिश्तों की नींव रखी।

FAQs: भारत–नेपाल संबंधों से जुड़े सामान्य प्रश्न:

Q1. India Nepal सीमा कितनी लंबी है?
India Nepal सीमा लगभग 1,751 किलोमीटर लंबी है और इसे दुनिया की सबसे खुली सीमाओं में गिना जाता है।

Q2. India Nepal के बीच मुख्य सीमा विवाद कौन-कौन से हैं?
मुख्य विवादित क्षेत्र हैं — कालापानी–लिपुलेख–लिम्पियाधुरा(उत्तराखंड) और सुस्ता(बिहार–नेपाल सीमा)।

Q3. “रोटी-बेटी का रिश्ता” क्या है?
यह शब्द भारत और नेपाल के गहरे सांस्कृतिक और पारिवारिक रिश्तों को दर्शाता है, जहाँ दोनों देशों के बीच वैवाहिक संबंध और सामाजिक जुड़ाव बहुत मजबूत हैं।

Q4. भारत और नेपाल के बीच कौन-कौन से जल संसाधन विवाद हैं?
कोसी, गंडक और महाकाली नदियों पर हुए समझौते और परियोजनाएँ अक्सर विवाद का कारण बनी हैं, खासकर बिजली और पानी के बँटवारे को लेकर।

Q5. India Nepal संबंधों का भविष्य कैसा है?
अगर दोनों देश संवाद और सहयोग को प्राथमिकता देते हैं, तो भविष्य में रिश्ते और भी मजबूत हो सकते हैं, खासकर आर्थिक, सांस्कृतिक और सुरक्षा के क्षेत्रों में।

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