India New Zealand FTA: समझौता क्या है और भारत के लिए क्यों अहम है।

भारत ने 2025 में अपनी Trade Policy को नया रुख देते हुए एक और अहम कदम उठाया है। UK और Oman के बाद अब New Zealand के साथ Free Trade Agreement (FTA) साइन किया गया है। अमेरिका द्वारा भारत पर 50% तक के भारी Tariffs लगाए जाने के बाद भारत तेजी से नए Global Markets की ओर बढ़ रहा है, ताकि किसी एक देश पर निर्भरता कम की जा सके।

India New Zealand FTA इसी रणनीति का हिस्सा है, जिसमें भारत ने अपने घरेलू हितों की रक्षा करते हुए Exports को बड़ा Boost देने की कोशिश की है। यह समझौता न सिर्फ दोनों देशों के व्यापार को नई दिशा देगा, बल्कि भारत की Economic Diplomacy को भी मजबूती देगा।

FTA होता क्या है?

Free Trade Agreement यानी ऐसा समझौता जिसमें दो देश आपस में तय करते हैं कि एक-दूसरे के Products और Services पर Import Duty (Tariff) कम या खत्म की जाएगी। इसका मकसद व्यापार बढ़ाना, Exports को बढ़ावा देना और अपने देश की कंपनियों के लिए नया Market खोलना होता है।

भारत इस साल तीसरा FTA क्यों साइन कर रहा है?

2025 में भारत ने अपनी Foreign Trade Policy को नई दिशा देते हुए अब तक तीन Free Trade Agreements साइन किए हैं। साल की शुरुआत में पहला FTA UK के साथ, दूसरा Oman के साथ और अब तीसरा New Zealand के साथ किया गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका द्वारा शुरू किए गए Trade War और भारत पर लगाए गए 50% के भारी Tariffs हैं।

इन परिस्थितियों में India New Zealand FTA इसी रणनीति का हिस्सा है, भारत अब अपने Exports के लिए नए Global Markets तलाश रहा है ताकि किसी एक देश, खासकर USA, पर व्यापारिक निर्भरता कम की जा सके और भारतीय अर्थव्यवस्था को ज्यादा स्थिर बनाया जा सके।

AI-generated image of India–New Zealand FTA signing
India–New Zealand FTA पर हस्ताक्षर करते भारत और न्यूज़ीलैंड के नेता (AI-generated illustrative image)

India New Zealand FTA में भारत ने क्या हासिल किया?

New Zealand के साथ हुए इस FTA में भारत की Bargaining काफी मजबूत रही है। यहाँ तक कि New Zealand की Opposition Party भी इस Agreement से खुश नहीं है। उनका कहना है कि इस समझौते में New Zealand को अपेक्षाकृत कम फायदा हुआ है, जबकि भारत की स्थिति ज्यादा मजबूत रही है।

हालाँकि भारत ने लगभग 95% New Zealand के Products पर Tariffs हटा दिए हैं, जिससे NZ को भारत के 1.4 अरब उपभोक्ताओं वाले Market तक पहुँच मिलेगी। लेकिन इसके बावजूद भारत ने अपने Dairy Sector को पूरी तरह Protect रखा है और New Zealand को इस सेक्टर में प्रवेश नहीं दिया है।

सबसे बड़ी बात यह है कि India New Zealand FTA के तहत भारत के 100% Exports पर New Zealand में 0% Duty लगेगी। इसका मतलब है कि भारतीय सामान New Zealand के बाजारों में बिना किसी Additional Tax के प्रवेश कर सकेगा, जिससे Exports बढ़ेंगे और भारत की Trade Competitiveness मजबूत होगी। यह कदम भारत की Economic Growth और Global Trade Strategy के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

Dairy sector को बाहर क्यों रखा गया?

अगर New Zealand से दूध और Dairy Products का आयात शुरू होता, तो इसका सीधा असर भारत के 8 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण परिवारों पर पड़ता। इससे लाखों लोगों का रोजगार खतरे में पड़ सकता था। इसी वजह से भारत ने Dairy Sector को FTA से बाहर रखकर घरेलू किसानों, दुग्ध उत्पादकों और MSMEs को सुरक्षित रखा है।

Exports, Trade Growth और USA पर दबाव:

इस FTA की सबसे बड़ी बात यह है कि भारत के 100% Exports पर New Zealand में Zero Duty लगेगी। पिछले साल दोनों देशों के बीच Trade लगभग 2 Billion Dollars का था, जो India New Zealand FTA के लागू होने के बाद बढ़कर 6–7 Billion Dollars तक जा सकता है। साथ ही, लगातार नए FTA करने से USA पर भी दबाव बढ़ेगा, खासकर तब जब अमेरिका भारत पर भारी Tariffs लगाए हुए है।

आज के Free Trade Agreements को समझने के लिए औपनिवेशिक विस्तार (Colonial Expansion) के इतिहास को देखना जरूरी है, जब व्यापार और सत्ता एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए थे।

India New Zealand FTA भारत की Economic Diplomacy और Trade Diversification Strategy का एक महत्वपूर्ण कदम है। इस समझौते के जरिए भारत ने अपने Exports बढ़ाने, नए Markets खोलने और घरेलू उद्योगों एवं किसानों को सुरक्षित रखने का संतुलन बनाए रखा है। साथ ही, लगातार नए FTA करने से भारत की Global Trade Position मजबूत होती है और USA जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था पर भी एक तरह का रणनीतिक दबाव भी बनता है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Exit mobile version