Venezuela पर अमेरिका द्वारा किए गए सैन्य हमले के बाद देश की स्थिति पूरी तरह अराजकता और भय के साए में चली गई है। सरकार इस समय पूर्ण आपातकाल जैसी हालत में काम कर रही है, जबकि राजधानी काराकास में हुई भीषण बमबारी के बाद आम नागरिक अपनी जान बचाने के लिए घर-बार छोड़कर शहर से बाहर निकलने को मजबूर हैं।
यह हमला महज एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि वेनेज़ुएला की राज्य-व्यवस्था, स्थिरता और राष्ट्रीय संप्रभुता पर सीधा और गंभीर प्रहार है।
Venezuela कहाँ है ?
Venezuela दक्षिण अमेरिका के उत्तरी हिस्से में स्थित एक महत्वपूर्ण देश है। इसके उत्तर में कैरिबियन सागर, पूर्व में गुयाना, पश्चिम में कोलंबिया और दक्षिण में ब्राजील स्थित हैं। अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण वेनेज़ुएला न केवल लैटिन अमेरिका बल्कि कैरिबियन क्षेत्र में भी रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है। इसके साथ ही, Venezuela के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, जिसने इसे वैश्विक ऊर्जा राजनीति का एक प्रमुख केंद्र बना दिया है।

अमेरिका ने Venezuela पर हमला क्यों किया?
वेनेज़ुएला पर अमेरिकी हमले को सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई के रूप में देखना अधूरा होगा। इसके पीछे कई गहरे राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक कारण छिपे हुए हैं।
अमेरिका का आधिकारिक तर्क: नशे की तस्करी
अमेरिका का आधिकारिक बयान है कि “Venezuela से बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ अमेरिका पहुँच रहे हैं, इसी कारण यह कार्रवाई की गई।” लेकिन यह तर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवालों के घेरे में है, क्योंकि अमेरिका में पहुँचने वाले अधिकांश नशीले पदार्थ मेक्सिको के रास्ते आते हैं। वेनेज़ुएला को इसका मुख्य स्रोत बताना तर्कसंगत नहीं लगता और इससे यह संकेत मिलता है कि असल कारण कुछ और हैं।
हमले के वास्तविक कारण:
- निकोलस मादुरो की सरकार और सत्ता नियंत्रण ー वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ऐसी सरकार चला रहे हैं जो अमेरिका के दबाव में नहीं आती और अमेरिकी नीतियों को खुली चुनौती देती है। अमेरिका लंबे समय से वेनेज़ुएला में Regime Change की कोशिश करता रहा है, और मादुरो उसकी रणनीति में सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं।
- चीन और रूस के साथ बढ़ती नजदीकी ー मादुरो सरकार ने चीन और रूस के साथ आर्थिक और सैन्य सहयोग बढ़ाया और अमेरिकी प्रभाव से बाहर निकलने की कोशिश की। अमेरिका इसे अपने Strategic Backyard (Latin America) में एक सीधी चुनौती के रूप में देखता है।
- दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार ー वेनेज़ुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है। ऊर्जा संकट और वैश्विक अस्थिरता के दौर में यह तेल अमेरिका की ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक तेल बाजार पर नियंत्रण के लिए बेहद अहम है। और यदि तेल पर नियंत्रण चाहिए, तो मादुरो को सत्ता से हटाना अनिवार्य हो जाता है।
- लैटिन अमेरिका में दबदबा बनाए रखने की रणनीति ー अमेरिका लंबे समय से लैटिन अमेरिका को अपना Influence Zone मानता आया है। Venezuela जैसे देश का स्वतंत्र नीति अपनाना और चीन–रूस की ओर झुकना, अमेरिका की इस सोच के खिलाफ जाता है।
अमेरिका का इतिहास: यह पहली बार नहीं है
अमेरिका द्वारा किसी देश पर सैन्य बमबारी या हस्तक्षेप कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी अमेरिका कई देशों में इस तरह की कार्रवाइयाँ कर चुका है, जिनमें प्रमुख हैं — इराक, लीबिया, सर्बिया, अफगानिस्तान और वियतनाम।
इनमें से ज्यादातर मामलों में एक समान पैटर्न साफ दिखाई देता है:
- पहले सैन्य हमला
- फिर सत्ता परिवर्तन या सत्ता को कमजोर करना
- और उसके बाद वर्षों तक चलने वाली अस्थिरता, गृहयुद्ध और प्रशासनिक अव्यवस्था
इतिहास बताता है कि ऐसे हस्तक्षेप अक्सर शांति नहीं, बल्कि लंबे समय तक फैली अराजकता और संघर्ष को जन्म देते हैं।

सबसे बड़ा सवाल: आगे क्या होगा?
अमेरिका के पास इस बात का कोई स्पष्ट उत्तर नहीं है कि राजधानी तबाह होने के बाद, शासन व्यवस्था ढह जाने के बाद, देश का भविष्य किस दिशा में जाएगा। इराक और सीरिया इसका स्पष्ट उदाहरण हैं, जहाँ सत्ता हटाने के बाद देश में लंबी अवधि तक अराजकता, गृहयुद्ध और सामाजिक पतन देखा गया।
यदि वही मॉडल Venezuela पर लागू किया गया, तो इसका असर केवल वेनेज़ुएला तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि इससे पूरा दक्षिण अमेरिका दशकों पीछे जा सकता है।
दक्षिण अमेरिका पर पड़ने वाला प्रभाव:
Venezuela पर हमला केवल उसी देश तक सीमित नहीं रहेगा। इसके बाद अमेरिका की नजर अगली बड़ी शक्ति, कोलंबिया पर हो सकती है।
अगर वेनेज़ुएला और कोलंबिया दोनों अस्थिर हो जाते हैं, तो इसका असर पूरे क्षेत्र पर पड़ेगा:
- ब्राजील पर गंभीर आर्थिक और राजनीतिक दबाव
- इक्वाडोर और पेरू भी प्रभावित होंगे
जहाँ तक सुरक्षा का सवाल है, अर्जेंटीना अपेक्षाकृत सुरक्षित दिखाई देता है, क्योंकि यह फिलहाल अमेरिका समर्थक नीति अपनाए हुए है और सीधे किसी भी संघर्ष में शामिल नहीं है।
लिथियम त्रिकोण और अमेरिकी रणनीति:
दक्षिण अमेरिका में बोलीविया, अर्जेंटीना और चिली मिलकर एक महत्वपूर्ण लिथियम क्षेत्र बनाते हैं, जिसे Lithium Triangle कहा जाता है।और लिथियम का उपयोग मुख्य रूप से लिथियम-आयन बैटरियों में, इलेक्ट्रिक वाहनों में और आधुनिक तकनीकी उपकरणों में किया जाता है।
ये Lithium Triangle काफी हद तक अमेरिकी माँग को पूरा करता है। इसी कारण अमेरिका इस क्षेत्र को फिलहाल सीधे चुनौती नहीं देगा।
लेकिन दक्षिण अमेरिका का उत्तरी हिस्सा, विशेषकर वेनेज़ुएला और उसके आस-पास के देश, इस सैन्य संघर्ष की आग में झुलस सकते हैं और व्यापक अस्थिरता का सामना कर सकते हैं।
रूस और चीन की भूमिका:
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रूस और चीन Venezuela की मदद के लिए खुलकर सामने आते हैं? जब रूस पहले से ही यूक्रेन संघर्ष में गहराई से उलझा हुआ है, तब यह भी देखने वाली बात होगी कि क्या अमेरिका खुद Venezuela के दलदल में फँस सकता है?
यदि रूस और चीन सक्रिय रूप से हस्तक्षेप करते हैं, तो यह टकराव केवल एक क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक शक्ति संघर्ष और सीधे अंतरराष्ट्रीय टकराव का रूप ले सकता है।
हाल के वर्षों में चीन जिस तरह से विभिन्न संघर्षों में कूटनीतिक भूमिका और श्रेय लेने की कोशिश करता रहा है, उसका एक उदाहरण ‘Operation Sindoor और China: युद्धविराम का श्रेय लेने की कोशिश’ भी है।
वेनेज़ुएला पर अमेरिका द्वारा किया गया हमला केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह सत्ता, संसाधनों और वैश्विक प्रभुत्व की एक बड़ी लड़ाई का हिस्सा है। तेल, भू-राजनीति और प्रभाव क्षेत्र की यह जंग सिर्फ वेनेज़ुएला तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पूरे दक्षिण अमेरिका की स्थिरता पर सवाल खड़े कर रही है।