Unification of Italy (1815–1870): Mazzini, Cavour और Garibaldi की कहानी

Unification of Italy, 19वीं सदी के यूरोप का सबसे बड़ा राजनीतिक बदलाव था। 19वीं सदी में यूरोप का नक्शा एक Puzzle की तरह बिखरा हुआ था और इस Puzzle का सबसे बड़ा टुकड़ा था Italy — एक ऐसा देश जो एक राष्ट्र नहीं, बल्कि कई छोटे-छोटे राज्यों का समूह था।

इटली का एकीकरण केवल “एक देश का बनना” नहीं है, बल्कि यह एक विचार (Nation-State), एक संघर्ष (Revolution), और एक रणनीति (Diplomacy) की कहानी है। और इस कहानी के तीन मुख्य नायक थे: Mazzini, Cavour और Garibaldi।

इटली का विभाजन:

Congress of Vienna (1815) के बाद Italy कई छोटे-छोटे राज्यों में बंट गया था। यह देश एक राजनीतिक इकाई नहीं, बल्कि अलग-अलग राजाओं और शक्तियों के अधीन था।

  • North Italy में Austria का दबदबा था।
  • Central Italy में Papal States (Church का शासन) था।
  • South Italy में Bourbon King का शासन था।
  • Sardinia-Piedmont एक छोटा, लेकिन मजबूत राज्य था, जो बाद में इटली का एकीकरण की रणनीति का केंद्र बना।
Unification of Italy se pehle 1815 ke baad Italy ka vibhajan, jisme alag-alag rajyon ka control dikhaya gaya hai.
1815 के बाद विभाजित इटली, जहाँ एकीकरण से पहले अलग-अलग शक्तियों का शासन था।

इस विभाजन का मतलब था:

  • Italy में एक एकीकृत पहचान (National Identity) का अभाव।
  • हर राज्य की अलग नीति, अलग सेना और अलग प्रशासन।
  • Europe की बड़ी ताकतों (Austria, France, Britain) की लगातार दखल अंदाजी।

इस स्थिति में Unification of Italy केवल राजनीतिक बदलाव नहीं था — यह एक राष्ट्रीय विचार (Nationalism) का जन्म था, जो आगे चलकर पूरे Europe में फैल गया।

Mazzini & Young Italy:

Giuseppe Mazzini (1805–1872) इटली के उन राष्ट्रीय नेताओं में से एक था जिसे “इटली का दिल” माना जाता है। Mazzini खुद एक Revolutionary Thinker और Nationalist Leader था, जिसने इटली को एक Unified Nation बनाने का सपना देखा।

Mazzini का जन्म Genoa में हुआ था। वह एक ऐसे परिवार से था जो Political Freedom और Independence में विश्वास रखता था। युवा अवस्था में ही उसने देखा कि Italy कई छोटे-छोटे राज्यों में बंटा हुआ है और लोग अपनी पहचान खो रहे हैं। इसी वजह से उसने National Unity के लिए संघर्ष करना शुरू किया।

Young Italy (1831):

1831 में Mazzini ने Young Italy (यंग इटली) नाम से एक Nationalist Movement शुरू किया। जिसका मुख्य उद्देश्य था ー

  • Italy को एक गणतंत्र बनाना
  • लोगों में National Pride (राष्ट्रीय गर्व) जगाना
  • “Italy for Italians” का विचार फैलाना
  • Italy को Foreign Domination (जैसे Austria और Church) से मुक्त करना

Mazzini ने युवाओं को जोड़कर एक Mass Movement बनाना चाहा। उसका मानना था कि Unification of Italy तभी संभव है जब लोग खुद इसके लिए उठ खड़े होंगे।

Mazzini की सोच का प्रभाव:

Mazzini ने यूरोप में nationalism और revolutionary ideas को बहुत जोर से फैलाया। उसकी विचारधारा ने इटली के लोगों में यह भावना पैदा की कि: “हम सिर्फ अलग-अलग राज्यों के लोग नहीं, बल्कि एक Italian nation हैं।” लेकिन Mazzini की रणनीति में एक कमजोरी भी थी—

उसका आंदोलन ज्यादातर आदर्शवादी था और अकेले संघर्ष पर आधारित था। Europe की बड़ी शक्तियाँ (Austria, France, Britain) और Italy के छोटे राजे इस तरह के Revolution को आसानी से दबा देते थे। इसलिए Mazzini के आंदोलन को समर्थन तो मिला, लेकिन राजनीतिक और सैन्य ताकत की कमी के कारण वह अकेले इटली का एकीकरण नहीं कर पाया।

Giuseppe Mazzini और Young Italy आंदोलन, जिसने इटली के एकीकरण (Unification of Italy) के लिए राष्ट्रीय चेतना और क्रांतिकारी विचार फैलाए।
Giuseppe Mazzini और Young Italy आंदोलन — इटली में राष्ट्रीय चेतना जगाने की शुरुआत।

फिर भी, Mazzini की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण थी क्योंकि उसने Italy में Nationalism की जड़ें मजबूत कीं—और यही बाद में Cavour और Garibaldi की रणनीतियों को सफल बनाने में मददगार साबित हुआ।

Cavour की Diplomacy:

Count Camillo di Cavour (1810–1861) Piedmont-Sardinia का प्रधानमंत्री था और उसे Unification of Italy का सबसे व्यावहारिक दिमाग माना जाता है। जहाँ Mazzini Revolution और Ideology पर विश्वास करता था, वहीं Cavour ने राजनीति और कूटनीति को अपना हथियार बनाया।

Cavour का मानना था कि Unification of Italy के लिए भावनाओं से ज्यादा रणनीति की जरूरत है। इसलिए उसने सबसे पहले Piedmont-Sardinia को मजबूत करने पर ध्यान दिया। उसकी प्रमुख रणनीतियाँ थीं:

  • Modernization – Railways, Industry, Economy और Army को Modern बनाया गया, ताकि Piedmont एक मजबूत राज्य बन सके।
  • International Diplomacy – Cavour ने यूरोप की बड़ी ताकतों से रिश्ते बनाए और Italy के मुद्दे को International Platform तक पहुँचाया।
  • Austria को कमजोर करना – Austria North Italy पर नियंत्रण रखता था, इसलिए उसे हटाए बिना इटली का एकीकरण संभव नहीं था।

France के साथ गठबंधन:

Cavour ने France के सम्राट Napoleon III से एक महत्वपूर्ण समझौता किया। इस समझौते के तहत France ने Austria के खिलाफ Piedmont-Sardinia का साथ देने का वादा किया। 1859 में इसी गठबंधन की वजह से Austro-Italian War हुई, जिसमें Austria को भारी नुकसान हुआ।

इस युद्ध के बाद Northern Italy के कई क्षेत्र Piedmont-Sardinia में शामिल हो गए। और यही Cavour की कूटनीति की सबसे बड़ी सफलता थी जिसमें उसने बिना बड़े जन-विद्रोह के, International Politics और Alliances के जरिए Unification of Italy की नींव रख दी।

Cavour ने साबित किया कि एक राष्ट्र सिर्फ तलवार से नहीं, बल्कि समझदारी भरी कूटनीति से भी बनता है।

Garibaldi की भूमिका:

Giuseppe Garibaldi (1807–1882) इटली का सबसे लोकप्रिय क्रांतिकारी नेता था। उसे अक्सर “जनता का सैनिक” कहा जाता है, क्योंकि वह आम लोगों के साथ और उनके लिए लड़ा।

Giuseppe Garibaldi Red Shirts ke saath 1860 me Italy ke ekikaran ke dauran sena ka netritva karte hue
Garibaldi का “Expedition of the Thousand” (1860) के दौरान Red Shirts के साथ नेतृत्व।

Redshirts और क्रांतिकारी भावना:

Garibaldi ने स्वयंसेवकों की एक सेना बनाई, जिसे Redshirts कहा गया। यह कोई नियमित सेना नहीं थी, बल्कि किसान, मजदूर और युवाओं का एक समूह था, जो इटली को एक राष्ट्र के रूप में देखना चाहता था। Garibaldi का उद्देश्य था:

  • दक्षिणी इटली के राज्यों को एकीकृत करना
  • लोगों में राष्ट्रीय चेतना जगाना
  • इटली के एकीकरण को जन-आंदोलन का रूप देना

एक हजार की यात्रा (1860):

1860 में Garibaldi की “एक हजार की यात्रा” Unification of Italy का सबसे निर्णायक मोड़ साबित हुई। केवल लगभग 1,000 स्वयंसेवकों के साथ उन्होंने सिसिली पर आक्रमण किया, जहाँ बॉर्बन राजा का शासन था। Garibaldi की सेना ने पहले सिसिली पर विजय प्राप्त की और उसके बाद नेपल्स पर अधिकार कर लिया। इस विजय के साथ ही पूरा दक्षिणी इटली Piedmont-Sardinia के अधीन आ गया।

Garibaldi का त्याग:

Garibaldi सत्ता का लोभी नहीं था। उसने जीते हुए क्षेत्रों को राजा विक्टर इमैनुएल द्वितीय को सौंप दिया, क्योंकि उसका लक्ष्य स्वयं शासन करना नहीं, बल्कि एकीकृत इटली का निर्माण था। Garibaldi ने यह सिद्ध कर दिया कि सच्चा राष्ट्रवादी अपने निजी हित से ऊपर देश को रखता है।

Wars (Austro-Italian War):

Unification of Italy में युद्धों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण थी जितनी विचारधारा और कूटनीति की। सबसे निर्णायक संघर्ष था Austro-Italian War (1859), जिसमें फ्रांस की सहायता से Piedmont-Sardinia ने Austria के विरुद्ध युद्ध किया।

उस समय ऑस्ट्रिया उत्तरी इटली की सबसे बड़ी शक्ति था। जब तक उसका प्रभाव समाप्त नहीं होता, इटली का एकीकरण संभव नहीं था। फ्रांस के सम्राट नेपोलियन तृतीय की मदद से पिडमॉन्ट–सार्डिनिया ने 1859 के युद्ध में ऑस्ट्रिया को पराजित कर दिया।

इस युद्ध के परिणामस्वरूप:

  • उत्तरी इटली के कई महत्वपूर्ण क्षेत्र, जैसे लॉम्बार्डी, Piedmont-Sardinia में शामिल हो गए।
  • Austria का प्रभुत्व इटली में काफी कमजोर हो गया।
  • इटली के एकीकरण की प्रक्रिया तेज हो गई।

इसके बाद 1866 में तृतीय इटालियन स्वतंत्रता युद्ध हुआ। इस युद्ध में इटली ने प्रशिया के साथ गठबंधन कर ऑस्ट्रिया को एक बार फिर पराजित किया। इस विजय के साथ वेनेटिया को इटली में शामिल कर लिया गया जिससे इटली का एकीकरण लगभग पूर्ण हो गया।

इन युद्धों ने यह स्पष्ट कर दिया कि इटली का एकीकरण केवल भावनात्मक आंदोलन नहीं था, बल्कि सुनियोजित सैन्य रणनीति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति का परिणाम था।

Final Unification of Italy:

1861 में इटली का पहला एकीकृत राज्य स्थापित हुआ और विक्टर इमैनुएल द्वितीय को इटली का राजा घोषित किया गया। यह एक ऐतिहासिक क्षण था, लेकिन इटली का एकीकरण अभी तक पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ था।

उस समय रोम पोप राज्यों (Papal States) के नियंत्रण में था। कैथोलिक चर्च का यहाँ शासन था और फ्रांसीसी सैनिक पोप की सुरक्षा कर रहे थे। जब तक रोम इटली का हिस्सा नहीं बनता, तब तक एकीकरण अधूरा माना जाता था।

1870 में Unification of Italy के बाद एकीकृत इटली का मानचित्र, जिसमें रोम राजधानी के रूप में दिखाया गया है।
Unified Italy Map (1870)

1870 में स्थिति बदल गई:

यूरोप में युद्ध की वजह से फ्रांसीसी सैनिक रोम से हट गए। इस अवसर का लाभ उठाकर इटली की सेना ने रोम पर अधिकार कर लिया। यही वह निर्णायक क्षण था जब इटली का एकीकरण पूर्ण हुआ और रोम को देश की राजधानी घोषित किया गया।

इस प्रकार दशकों के संघर्ष, कूटनीति और युद्ध के बाद इटली एक बिखरे हुए भूभाग से एक संगठित राष्ट्र में बदल गया।

Unification of Italy के भू-राजनीतिक प्रभाव:

इटली का एकीकरण केवल एक नए देश का निर्माण नहीं था, बल्कि इसने पूरे यूरोप की भू-राजनीति (Geopolitics) को गहराई से प्रभावित किया।

  • राष्ट्र–राज्य की अवधारणा मजबूत हुई – इटली के एकीकरण ने यह साबित कर दिया कि भाषा, संस्कृति और साझा पहचान के आधार पर एक राष्ट्र बनाया जा सकता है। इससे पूरे यूरोप में राष्ट्रवाद (Nationalism) को नई ताकत मिली।
  • ऑस्ट्रिया की शक्ति कमजोर हुई- इटली के एकीकरण के बाद ऑस्ट्रिया का प्रभाव उत्तरी इटली से लगभग समाप्त हो गया। इससे मध्य यूरोप में शक्ति संतुलन (Balance of Power) बदल गया और ऑस्ट्रिया एक प्रमुख महाशक्ति से धीरे-धीरे कमजोर साम्राज्य बनता चला गया।
  • यूरोप का शक्ति संतुलन बदला- इटली के एकीकृत होने से फ्रांस और प्रशिया की रणनीतियाँ बदलीं, जर्मनी के एकीकरण का रास्ता साफ हुआ और यूरोप में नई Alliances और Rivalries उभर कर सामने आईं। इटली का एकीकरण वास्तव में जर्मनी के एकीकरण की भूमिका तैयार करता है।
  • चर्च और राजनीति का टकराव- रोम के इटली में शामिल होने से चर्च की राजनीतिक शक्ति सीमित हो गई। यह आधुनिक राजनीति की दिशा में एक बड़ा कदम था, जहाँ धर्म और राज्य को अलग करने की सोच मजबूत हुई।
  • भविष्य के संघर्षों की नींव- राष्ट्रवाद की इसी लहर ने आगे चलकर औपनिवेशिक प्रतिस्पर्धा, सैन्य गठबंधनों और अंततः प्रथम विश्व युद्ध जैसी परिस्थितियाँ पैदा कीं। इस तरह इटली का एकीकरण आधुनिक यूरोपीय राजनीति का Turning Point साबित हुआ।

उस समय दुनिया का शक्ति केंद्र क्या था?

19वीं सदी के मध्य में, जब Unification of Italy (1815–1870) हो रहा था, उस समय दुनिया का शक्ति केंद्र यूरोप था। आज के समय की तरह संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) तब वैश्विक राजनीति का मुख्य खिलाड़ी नहीं बना था। उस दौर में वैश्विक शक्ति इन देशों के हाथों में थी:

ब्रिटेन (Britain):

ब्रिटेन उस समय दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति था।

  • विशाल औपनिवेशिक साम्राज्य
  • मजबूत नौसेना
  • वैश्विक व्यापार पर नियंत्रण

इसी वजह से ब्रिटेन के लिए बोला जाता था ー “जिस साम्राज्य में सूरज कभी नहीं डूबता”

फ्रांस (France):

फ्रांस यूरोप की एक प्रमुख सैन्य और कूटनीतिक शक्ति था। नेपोलियन तृतीय के समय फ्रांस ने Unification of Italy में सक्रिय भूमिका निभाई। फ्रांस की सहमति और समर्थन के बिना यूरोप में बड़े राजनीतिक बदलाव मुश्किल थे।

ऑस्ट्रिया (Austria):

ऑस्ट्रिया मध्य यूरोप की सबसे प्रभावशाली शक्ति था।

  • उत्तरी इटली पर सीधा नियंत्रण
  • जर्मन राज्यों और बाल्कन क्षेत्र में प्रभाव

इटली का एकीकरण दरअसल ऑस्ट्रिया की इसी शक्ति को चुनौती देने की प्रक्रिया थी।

प्रशिया (Prussia):

19वीं सदी में एक उभरती हुई शक्ति था, जिसकी ताकत उसकी मजबूत सेना और अनुशासित प्रशासन में थी। 1866 में इटली के साथ मिलकर प्रशिया ने ऑस्ट्रिया को हराया, जिससे इटली को वेनेटिया मिला और प्रशिया के नेतृत्व में जर्मनी के एकीकरण की नींव पड़ी।

इटली के एकीकरण की कहानी सिर्फ तीन नेताओं की नहीं थी, बल्कि यूरोप के बदलते राजनीतिक माहौल की भी कहानी है। 19वीं सदी में Napoleon Bonaparte की युद्ध-यात्राओं और उसके बाद बने नए European order ने nationalism को जन्म दिया, और इसी नई सोच ने धीरे-धीरे इटली को एक राष्ट्र बनने की दिशा में प्रेरित किया। जानिए Napoleon Bonaparte की राजनीति और युद्धों ने यूरोप को कैसे बदला।

Unification of Italy (1815–1870) एक ऐसी ऐतिहासिक कहानी है जिसमें Mazzini ने राष्ट्रवाद का विचार दिया, Cavour ने कूटनीतिक रणनीति बनाई, और Garibaldi ने संघर्ष और युद्ध के माध्यम से उसे वास्तविकता में बदला। यह इतिहास केवल इटली तक सीमित नहीं है, बल्कि आधुनिक भू-राजनीति की नींव है। क्योंकि इटली के एकीकरण ने यह स्पष्ट कर दिया कि एक राष्ट्र का निर्माण केवल सीमाओं से नहीं, बल्कि विचारों, रणनीति और बलिदान से होता है।

 

 

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