Operation Sindoor और China: युद्धविराम का श्रेय लेने की कोशिश

हाल ही में चीन ने ठीक उसी तरह एक बड़ा दावा करना शुरू किया है, जैसे अक्सर डोनाल्ड ट्रंप वैश्विक मंच पर करते रहे हैं। चीन का कहना है कि Operation Sindoor के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच पैदा हुए तनाव को चीन ने अपनी “मध्यस्थता” के जरिये शांत कराया।

यह दावा भारत में इसलिए भी चौंकाने वाला माना जा रहा है, क्योंकि उसी दौर में पाकिस्तान ने चीन में बनी PL-15E मिसाइल भारत की ओर दागी थी, जो पूरी तरह विफल साबित हुई। इसी PL-15E मिसाइल की विफलता और उसकी Reverse Engineering को लेकर हम पहले ही अपने ब्लॉग पर विस्तार से लिख चुके हैं, जिसे आप यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं ー Chinese Missile PL-15E और भारत की Reverse Engineering

AI-generated image of Chinese Foreign Minister Wang Yi delivering a diplomatic speech- operation sindoor mediation

चीन इतना बड़ा दावा क्यों कर रहा है?

फिर भी सवाल यही है कि चीन इतना बड़ा दावा क्यों कर रहा है? PL-15E मिसाइल की असफलता के बावजूद चीन अब खुले तौर पर यह कह रहा है कि भारत–पाकिस्तान के बीच पैदा हुए तनाव को उसी ने “सुलझाया”।

असल में यह दावा किसी एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि चीन की एक बड़ी कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है। चीन अंतरराष्ट्रीय मंच पर खुद को एक ऐसे देश के रूप में पेश करना चाहता है जो सिर्फ हथियार बेचने वाला नहीं, बल्कि संघर्षों को शांत कराने वाला Peace-Promoting Global Power भी है।

यही वजह है कि बीजिंग अपने आधिकारिक बयानों में “To build peace that lasts” जैसे वाक्यों का इस्तेमाल करता है, ताकि वह खुद को एक जिम्मेदार और समाधान देने वाली वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित कर सके।

इन खोखले दावों के पीछे चीन की क्या सोच है ?

चीन के लिए इस तरह के दावे केवल बयान नहीं होते, बल्कि यह उसकी दीर्घकालीन भू-राजनीतिक रणनीति का हिस्सा होते हैं। Operation Sindoor जैसे संवेदनशील सैन्य अभियान पर Mediation का श्रेय लेने का उद्देश्य केवल यह नहीं है कि उसे वैश्विक मंच पर दिखाया जाए, बल्कि

  • इसके माध्यम से चीन अपनी कूटनीतिक महत्वता को बढ़ाना चाहता है।
  • South Asia के शक्ति समीकरणों में अपनी पैठ बनाना चाहता है।
  • भारत को अप्रत्यक्ष रूप से अंतरराष्ट्रीय दबाव के दायरे में लाने की कोशिश करना है।

China का Mediation Narrative: एक Pattern

चीन ने हाल ही के कई Conflicts को अपने Mediation Credit List में डालने की कोशिश की है: जैसे-

  1. Northern Myanmar Mediation
  2. Palestine–Israel Peace Efforts
  3. Cambodia–Thailand Conflict
  4. India–Pakistan Tensions (Operation Sindoor)

लेकिन सवाल यह है कि क्या Operation Sindoor में वाकई किसी तीसरे देश ने मध्यस्थता की?

भारत का आधिकारिक रुख क्या रहा है?

भारत का आधिकारिक रुख बिल्कुल स्पष्ट रहा है। प्रधानमंत्री ने संसद में खड़े होकर साफ शब्दों में कहा था कि “दुनिया के किसी भी नेता ने भारत को अपना ऑपरेशन रोकने के लिए नहीं कहा।” इस बयान का सीधा और साफ मतलब यही है कि Operation Sindoor पर किसी भी तरह का विदेशी दबाव नहीं था। न अमेरिका, न चीन और न ही किसी अन्य देश की इस पूरे घटनाक्रम में कोई भूमिका रही।

AI-generated image of Indian Prime Minister Narendra Modi addressing Parliament

वास्तविकता यह है कि पाकिस्तान की ओर से भारत को यह अनुरोध आया कि अब संघर्ष को आगे न बढ़ाया जाए। इसके बाद भारत ने अपनी सैन्य और रणनीतिक स्थिति का आकलन करते हुए Operation Sindoor को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला किया।

यह फैसला पूरी तरह भारत का Sovereign और Self-Controlled Decision था, जिसका किसी भी तरह की मध्यस्थता से कोई संबंध नहीं था।

Narrative warfare में भारत पीछे क्यों रह जाता है?

समस्या यह नहीं है कि भारत ने बयान नहीं दिया, बल्कि यह है कि उसे विश्व स्तर पर पर्याप्त जोर से पेश नहीं किया गया। मीडिया, कूटनीति और सोशल प्लेटफॉर्म्स पर कोई Unified Narrative तैयार नहीं किया गया, जो भारत की बात को स्पष्टता के साथ दुनियां के सामने मजबूती से रख पाता।

इसका नतीजा यह हुआ कि चीन जैसे देश आसानी से Credit Hijack कर लेते हैं और भारत Narrative Battlefield में Defensive स्थिति में चला जाता है। विपक्षी नेताओं ने भी इस पर सवाल उठाया है कि ऐसे दावे भारत की National Security का मजाक बना देते हैं, और सरकार को इस पर स्पष्ट, आधिकारिक स्पष्टीकरण देना आवश्यक है।

अब भारत को क्या करना चाहिए?

भारत के लिए यह बेहद जरूरी है कि वह विश्व स्तर पर, जैसे कि संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में, स्पष्ट रूप से कहे कि Operation Sindoor को किसी भी अन्य देश ने नहीं रोका। साथ ही यह दोहराए कि यह पूरी तरह भारत का Self-Controlled Military Pause था और इसमें USA, China या किसी भी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं थी।

जब तक भारत स्वयं अपने Narrative को Aggressively और स्पष्ट रूप से पेश नहीं करेगा, तब तक अन्य देश, खासकर चीन, इस तरह के घटनाक्रम का Credit लेने की कोशिश जारी रखेंगे।

इसी कड़ी में, भारत की समुद्री ताकत और रणनीतिक क्षमता को समझने के लिए आप हमारे ब्लॉग में पढ़ सकते हैं कि कैसे INS Arighaat से K-4 मिसाइल का हाल ही में बंगाल की खाड़ी में सफल परीक्षण किया गया था, जिससे भारत की Sea-Based Nuclear Deterrence और सैन्य तैयारी का अंदाजा लगाया जा सकता है।

यहाँ क्लिक करें – K4 Missile Test: आत्मरक्षा की सोच और समुद्र से उभरती भारत की ताकत

Operation Sindoor सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, यह एक Strategic Signal भी था — और इसका पूरा नियंत्रण भारत के हाथ में रहा। चीन का Mediation Claim जमीनी हकीकत से कहीं ज्यादा Global Image Building और प्रचार (Propaganda) का हिस्सा लगता है। अब वक्त आ गया है कि भारत केवल Battlefield में ही नहीं, बल्कि Narrative Battlefield में भी अपनी नेतृत्व क्षमता स्पष्ट रूप से दिखाए।

 

 

 

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