Napoleon Bonaparte की 1815 में हार के बाद यूरोप सिर्फ युद्ध से नहीं, बल्कि राजनीतिक अस्थिरता और भविष्य के डर से भी थक चुका था। लगातार दो दशकों तक चले संघर्षों ने यह सवाल खड़ा कर दिया था कि क्या यूरोप बिना युद्ध के भी शांति और संतुलन बनाए रख सकता है?
इसी पृष्ठभूमि में 1815 में Congress of Vienna आयोजित हुई, जहाँ यूरोप की बड़ी शक्तियों ने महाद्वीप की नई राजनीतिक व्यवस्था तय की। Congress of Vienna से ही Concert of Europe की अवधारणा निकली— जिसका उद्देश्य था यूरोप में शक्ति संतुलन (Balance of Power) बनाए रखना और यह सुनिश्चित करना कि कोई एक ताकत फिर से पूरे यूरोप पर हावी न हो सके।
Concert of Europe क्या था?
Concert of Europe, Congress of Vienna के बाद यूरोप की बड़ी शक्तियों के बीच बना एक Informal Alliance था। इसमें कोई लिखित संविधान या Formal Treaty नहीं थी, लेकिन सभी देशों ने मिलकर महाद्वीप में शांति और स्थिरता बनाए रखने का वादा किया। बड़े राजनीतिक और सैन्य फैसले आमतौर पर आपसी बैठकों (Congresses) के जरिए लिए जाते थे, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी शक्ति अकेले पूरी यूरोप में हावी न हो।

Concert of Europe में कौन-कौन सी शक्तियाँ थीं?
Concert of Europe में शुरुआत में मुख्य रूप से पाँच बड़ी शक्तियाँ (Great Powers) शामिल थींー
- Britain – समुद्री शक्ति और वैश्विक व्यापार में प्रमुख।
- Austria – मध्य यूरोप में राजनीतिक संतुलन बनाए रखने वाली ताकत।
- Russia – यूरोप के पूर्वी हिस्से में प्रभुत्व रखने वाली शक्ति।
- Prussia – जर्मनी के हिस्सों में स्थिरता सुनिश्चित करने वाला देश।
- France – Napoleon के बाद System में दोबारा वापसी हुई।
इन शक्तियों ने मिलकर यूरोप में शांति और शक्ति संतुलन बनाए रखने की कोशिश की। बाद में अन्य देश और राज्यों ने भी कुछ मामलों में सहयोग किया, लेकिन Decision-Making Power मुख्य रूप से इन Great Powers के हाथ में ही थी।
Concert of Europe काम कैसे करता था?
Concert of Europe का काम करने का तरीका काफी Unique और Informal था। इसमें कोई लिखित नियम या Binding Treaty नहीं थी, लेकिन बड़े राजनीतिक फैसले इन तरीकों से लिए जाते थेー
- Regular Diplomatic Meetings – बड़ी शक्तियों के शासक और उनके प्रतिनिधि समय-समय पर मिलते थे और महाद्वीप की शांति बनाए रखने के लिए चर्चा करते थे।
- Collective Decision Making – यदि किसी देश में क्रांति या युद्ध जैसी स्थिति पैदा होती, तो सभी Great Powers मिलकर समाधान ढूंढते थे। इससे यह सुनिश्चित होता था कि कोई एक ताकत अकेले यूरोप में हावी न हो।
- Balance of Power – सभी निर्णयों का मुख्य उद्देश्य शक्ति संतुलन बनाए रखना था। किसी भी देश को बहुत ताकतवर होने से रोककर यूरोप में स्थिरता कायम रखी जाती थी।
Concert of Europe की सफलताएँ:
Concert of Europe ने यूरोप में लंबे समय तक शांति और स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लगभग 40 साल तक महाद्वीप में कोई बड़ा युद्ध नहीं हुआ, जिससे देशों को आर्थिक और सामाजिक विकास का समय मिला। इस व्यवस्था ने France को भी नेपोलियन के बाद दोबारा मुख्य धारा में शामिल किया, जिससे महाद्वीप की राजनीति में संतुलन कायम रहा। सबसे बड़ी उपलब्धि यह थी कि Diplomacy को युद्ध से ऊपर रखा गया, और देशों ने आपसी समझ और बैठकों के जरिए विवादों का समाधान किया।
साथ ही, Concert of Europe ने अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की नींव रखी। इसकी सोच आज संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council), NATO और अन्य गठबंधनों में दिखाई देती है, जहाँ बड़ी शक्तियाँ मिलकर विवादों का समाधान करती हैं और वैश्विक शांति बनाए रखने की कोशिश करती हैं। इस तरह, यह प्रणाली केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि आधुनिक अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा और सहयोग की आधारशिला भी बनी।
Concert of Europe क्यों टूटा?
राष्ट्रवाद का उदय:
- 19वीं सदी में लोगों में देशभक्ति और अपनी पहचान की भावना बहुत बढ़ गई थी।
- Italy और Germany में राष्ट्रीय एकता की माँगें शुरू हुईं।
- कई छोटे राज्यों के लोग स्वतंत्रता चाहते थे, जिससे पुराने Balance of Power पर असर पड़ा।
- अब लोग सिर्फ राजा या राज्य की इच्छाओं के पीछे ना चलके अपनी राष्ट्रीय पहचान और हक के लिए लड़ने लगे थे।
1848 की क्रांतियाँ:
- Europe में कई देशों में क्रांतियाँ हुईं, जिसे “Spring of Nations” कहा जाता है।
- Austria, France, Italy और Germany में बड़े बदलाव की माँग उठी।
- इन क्रांतियों ने पुरानी व्यवस्था को चुनौती दी और European Powers के बीच समन्वय को मुश्किल बना दिया।
Britain की क्रमिक वापसी:
- Britain धीरे-धीरे Continental Politics से पीछे हटने लगा।
- Britain ज्यादा इच्छुक था Colonial Expansion और Trade में।
- इसका मतलब यह हुआ कि यूरोप की सबसे बड़ी समुद्री शक्ति अब यूरोप की शांति व्यवस्था में उतनी सक्रिय नहीं थी।
Colonial & Economic Competition:
- यूरोप के देशों में संसाधनों और Colonies पर Competition बढ़ गया।
- France, Britain और Germany जैसी Powers अपनी ताकत बढ़ाने के लिए Colonization और नए Trade Routes पर Focus करने लगीं।
- इससे European Balance of Power कमजोर हुआ क्योंकि सभी देश सिर्फ अपने आर्थिक और Colonial फायदे देखने लगे।

Concert of Europe (1815–1850) के समय में भारत की स्थिति:
British East India Company का प्रभुत्व:
- इस समय भारत पूरी तरह से British East India Company के Control में था।
- अधिकांश भारत (अर्थात Bengal, Bombay, Madras Presidencies) सीधे कंपनी के Under था, जबकि कुछ छोटे Princely States भी Company के Indirect Control में थे।
- उस समय Company की Policy थी “Subsidiary Alliances” और “Doctrine of Lapse” से राज्यों को अपने अधीन करना।
राज्य और साम्राज्य का विवाद:
- छोटे रियासतों (जैसे Awadh, Hyderabad) में आतंरिक संघर्ष और British हस्तक्षेप जारी था।
- Maratha Empire धीरे-धीरे British Influence के अंतर्गत आ रहा था (Third Anglo-Maratha War 1817–1818 में खत्म हुई थी)।
सांस्कृतिक और आर्थिक बदलाव:
- ब्रिटिश व्यापार और कृषि नीतियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुँचना शुरु कर दिया था।
- नए कानून और शिक्षा प्रणालियाँ (जैसे Charter Act 1813) शुरू हो चुकी थी।
विद्रोह और असंतोष के बीज:
- इस समय भारत में बड़े पैमाने का विद्रोह नहीं हुआ था, लेकिन धीरे-धीरे Local Uprisings और Dissatisfaction बढ़ रहा था ー मतलब 1857 की बड़ी क्रांति के बीज बोए जा रहे थे।
- लोग British Control और Unfair Taxation से परेशान थे।
आधुनिक संपर्क और बदलाव:
- British Ports और Trade Networks ने भारत को यूरोप और दुनिया से जोड़ा।
- Europe में जो Industrial Revolution और political Ideas चल रहे थे, उनका Indirect प्रभाव भारत में भी देखने को मिल रहा था।
Concert of Europe का आधुनिक Geopolitics से Connection:
Concert of Europe ने दिखाया कि बड़ी शक्तियाँ मिलकर महाद्वीप में शांति और स्थिरता बनाए रख सकती हैं। यही सोच आज के कई अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों में दिखाई देती है। उदाहरण के लिए, UN Security Council का Idea इसी Principle से आया था, जहाँ बड़े देशों के बीच Discussion और Collective Decision-Making होती है।
वहीं, NATO और अन्य Alliances भी उस समय के Balance of Power System का आधुनिक Prototype हैं। आज के Ukraine Conflict जैसे मामले में भी देशों की रणनीति और समझौते यही दिखाते हैं कि शक्ति संतुलन (Balance of Power) Logic अब भी Geopolitics का अहम हिस्सा है।
Concert of Europe ने यह साबित किया कि यदि बड़ी शक्तियाँ आपसी सहयोग और कूटनीति को प्राथमिकता दें, तो लंबे समय तक युद्ध को टाला जा सकता है। हालाँकि Nationalism, Revolutions और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण यह व्यवस्था टूट गई, लेकिन इसका मूल विचार आज भी प्रासंगिक है। UN Security Council, NATO जैसे Modern Alliances और समकालीन संघर्ष दिखाते हैं कि Balance of Power अब भी वैश्विक राजनीति का आधार बना हुआ है। इस तरह, Concert of Europe केवल 19वीं सदी की एक ऐतिहासिक व्यवस्था नहीं, बल्कि आधुनिक Geopolitics को समझने की एक महत्वपूर्ण कुंजी है।