भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक Aravalli Hills, हिमालय से भी करोड़ों साल पुरानी मानी जाती हैं। कभी यह पर्वत श्रृंखला इतनी ऊँची थी कि वैज्ञानिकों के अनुसार, अपने समय में यह हिमालय से भी ऊँची रही होगी। लेकिन प्राकृतिक क्षरण (Erosion), समय और मानवीय हस्तक्षेप ने इसे धीरे-धीरे कमजोर कर दिया।
आज Aravalli Hills एक बार फिर चर्चा में हैं — वजह है केंद्र सरकार द्वारा लाई गई एक नई परिभाषा, जिसे Supreme Court ने स्वीकार कर लिया है। इस परिभाषा ने पर्यावरणविदों, भूवैज्ञानिकों और आम नागरिकों को गहरी चिंता में डाल दिया है।
Aravalli Hills क्या हैं?
Aravalli Hills एक अत्यंत प्राचीन पर्वत प्रणाली है, जिसकी उम्र लगभग1.5 से 2.5 अरब वर्ष मानी जाती है। यह न केवल भारत बल्कि दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में शामिल है।
- यह गुजरात से शुरू होकर राजस्थान, हरियाणा होते हुए दिल्ली (Raisina Hills) तक जाती है।
- राष्ट्रपति भवन भी Aravalli के ही एक विस्तारित हिस्से पर स्थित है।
- इसकी कुल लंबाई लगभग 670–800 किमी है।
- औसत ऊँचाई लगभग 700–750 मीटर मानी जाती है।
समय के साथ बारिश, हवा और भू-क्षरण ने इन पहाड़ियों को काफी हद तक घिस दिया है। ऊपर से अवैध खनन (Illegal Mining) ने Aravalli Hills को अंदर से खोखला कर दिया है।

100 मीटर की नई परिभाषा क्या है?
केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित और Supreme Court द्वारा स्वीकार की गई नई परिभाषा के अनुसार, अब सिर्फ वही पहाड़ियाँ Aravalli Hills का हिस्सा मानी जाएँगी, जो अपने आसपास की जमीन से कम से कम 100 मीटर ऊँची हों। इसका सीधा मतलब यह है कि जिन पहाड़ियों की ऊँचाई 100 मीटर से कम है, वे अब आधिकारिक रूप से Aravalli Hills की श्रेणी से बाहर हो सकती हैं।
परिणामस्वरूप, ऐसे क्षेत्रों पर लागू होने वाले कई पर्यावरणीय प्रतिबंध और संरक्षण नियम कमजोर पड़ सकते हैं, जिससे Aravalli के बड़े हिस्से का संरक्षण ढांचा प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
यह परिभाषा इतनी खतरनाक क्यों मानी जा रही है?
इस नई परिभाषा को लेकर सबसे बड़ी चिंता यह है कि Aravalli की लगभग 90 प्रतिशत पहाड़ियाँ 100 मीटर से कम ऊँचाई की हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, Aravalli क्षेत्र में कुल 12,081 पहाड़ियाँ दर्ज की गई हैं, जिनमें से केवल लगभग 1,048 पहाड़ियाँ ही 100 मीटर से अधिक ऊँची हैं। यदि 100 मीटर वाली यह परिभाषा पूरी तरह लागू कर दी जाती है, तो Aravalli का करीब 90 प्रतिशत क्षेत्र संरक्षण के दायरे से बाहर हो सकता है।
इसका सीधा परिणाम यह होगा कि इतने बड़े इलाके में कानूनी और अवैध—दोनों तरह का खनन आसानी से शुरू किया जा सकेगा। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब Aravalli का अधिकांश हिस्सा ही समाप्त कर दिया जाएगा, तो फिर “Aravalli Hills” नाम से वास्तव में बचेगा ही क्या?
उत्तर भारत पर इसके संभावित प्रभाव:
Aravalli Hills केवल कुछ बिखरी हुई पहाड़ियाँ नहीं हैं, बल्कि यह उत्तर भारत के पर्यावरणीय संतुलन की एक प्राकृतिक रीढ़ है। अगर Aravalli का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा प्रभावी रूप से समाप्त कर दिया जाता है, तो इसके उत्तर भारत पर बेहद गंभीर और दीर्घकालिक परिणाम देखने को मिलेंगे।
Thar Desertification का फैलाव:
किसी भी मरुस्थल का फैलाव एक “कैंसर” की तरह होता है—धीरे, लेकिन लगातार। और उसे रोक पाना बेहद मुश्किल होता है। Aravalli पर्वतमाला पश्चिम से आने वाली गर्म, शुष्क हवाओं और रेतीले तूफानों के खिलाफ एक प्राकृतिक दीवार की तरह काम करती है। यह दीवार थार की सूखी हवाओं को पूर्वी भारत की ओर बढ़ने से रोकती है और नमी, वनस्पति तथा वर्षा के संतुलन को बनाए रखती है।
अगर Aravalli की यह प्राकृतिक सुरक्षा कमजोर होती है या बड़े पैमाने पर नष्ट कर दी जाती है, तो थार मरुस्थल का प्रभाव पूर्वी राजस्थान से निकलकर Delhi–NCR, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक तेजी से फैल सकता है। इसका सीधा असर मिट्टी की नमी के खत्म होने, उपजाऊ भूमि के बंजर बनने और जलवायु के अत्यधिक शुष्क हो जाने के रूप में दिखाई देगा।
एक बार रेगिस्तान का यह फैलाव शुरू हो गया, तो उसे वापस रोकना लगभग असंभव हो जाता है—जैसे कैंसर शरीर में फैलने के बाद उसे नियंत्रित करना कठिन हो जाता है। यही कारण है कि Aravalli का संरक्षण केवल पहाड़ियों को बचाने का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत को मरुस्थलीकरण से बचाने की लड़ाई है।
तापमान में भारी वृद्धि:
Aravalli Hills उत्तर भारत के लिए एक प्राकृतिक ग्रीन बैरियर की तरह काम करती हैं, जो तापमान को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। इन पहाड़ियों पर मौजूद जंगल और वनस्पति सूर्य की गर्मी को सीधे जमीन पर पड़ने से रोकते हैं और प्राकृतिक रूप से अपने आस-पास के क्षेत्र की गर्मी को नियंत्रित करते हैं।
अगर Aravalli का बड़े पैमाने पर विनाश होता है, तो जंगल खत्म होंगे, जिससे खुली चट्टानें और बंजर जमीन सूर्य की गर्मी को ज्यादा मात्रा में सोखने लगेंगी। इसका सीधा परिणाम होगा—दिन के तापमान में तेज बढ़ोतरी और रात को भी गर्मी का बने रहना।
Delhi-NCR, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और आसपास के शहरी इलाकों में Urban Heat Island Effect और अधिक खतरनाक रूप ले सकता है, जहाँ कंक्रीट, सड़कें और इमारतें पहले से ही गर्मी को फँसाकर रखती हैं। Aravalli के कमजोर होने से यह प्रभाव कई गुना बढ़ सकता है, जिससे हीटवेव, स्वास्थ्य समस्याएँ और ऊर्जा की खपत लगातार बढ़ती जाएगी।
Delhi-NCR में प्रदूषण का विस्फोट:
Aravalli Hills दिल्ली-NCR के लिए एक प्राकृतिक एयर-फिल्टर और डस्ट-शिल्ड की तरह काम करती हैं। यह पर्वतमाला पश्चिम से आने वाले धूल भरे तूफानों और रेगिस्तानी कणों को रोकने में अहम भूमिका निभाती है, जिससे भारी मात्रा में धूल सीधे दिल्ली-NCR की हवा में घुलने से बच जाती है। इसके साथ-साथ Aravalli के जंगल और वनस्पति हवा में मौजूद प्रदूषकों को अवशोषित करने उन्हें फैलने से रोकने में मदद करते हैं।
अगर Aravalli कमजोर होती है या बड़े पैमाने पर नष्ट कर दी जाती है, तो धूल, PM10 और PM2.5 जैसे सूक्ष्म कणों का प्रवाह बिना किसी रुकावट के दिल्ली-NCR तक पहुँचेगा। इसका नतीजा यह होगा कि इस क्षेत्र का AQI मौजूदा खतरनाक स्तर से भी कहीं अधिक खराब हो सकता है। इससे साँस की बीमारियाँ, हृदय रोग, बच्चों और बुज़ुर्गों की स्वास्थ्य समस्याएँ बढ़ेंगी और दिल्ली-NCR का प्रदूषण संकट एक स्थायी आपातकाल का रूप ले सकता है।
Wildlife corridors का टूटना:
Aravalli Hills केवल पहाड़ों की एक श्रृंखला नहीं हैं, बल्कि उत्तर भारत की वन्यजीव जीवनरेखा (Wildlife Lifeline) हैं। यह क्षेत्र कई प्रजातियों के लिए प्राकृतिक Migration Routes और सुरक्षित Breeding Grounds का काम करता है, जहाँ जानवर मौसम, भोजन और पानी की उपलब्धता के अनुसार एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में सुरक्षित रूप से आ-जा सकते हैं। लेकिन बड़े पैमाने पर खनन, सड़कें और निर्माण गतिविधियाँ Aravalli को छोटे-छोटे टुकड़ों में बाँट देंगी, जिसे Habitat Fragmentation कहा जाता है।
इसके परिणामस्वरूप Wildlife Corridors टूट जाते हैं और जानवर सीमित, अलग-थलग पड़े इलाकों में सिमटने को मजबूर हो जाते हैं। जब जानवरों की आवाजाही बाधित होती है, तो न केवल उनकी प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है, बल्कि उनके भोजन और पानी के स्रोत भी सिमट जाते हैं। यह स्थिति लंबे समय में कई प्रजातियों के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

Food chain और Biodiversity पर असर:
जब Aravalli जैसे प्राकृतिक आवास टूटते हैं, तो इसका असर केवल कुछ जानवरों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी Food Chain पर पड़ता है। किसी भी Ecosystem में शिकार और शिकारी के बीच एक नाज़ुक संतुलन होता है—शाकाहारी प्रजातियाँ वनस्पति पर निर्भर होती हैं और मांसाहारी प्रजातियाँ शाकाहारी प्रजातियों पर।
लेकिन जब Mining, Construction और Fragmentation के कारण प्राकृतिक आवास बिखर जाते हैं, तो यह संतुलन बिगड़ने लगता है। कुछ प्रजातियाँ भोजन की कमी से खत्म होने लगती हैं, जबकि कुछ असामान्य रूप से बढ़ जाती हैं, जिससे Ecosystem अस्थिर हो जाता है।
Inbreeding और कमजोर पीढ़ियाँ:
जब Mining और Habitat Fragmentation के कारण वन्यजीव छोटे-छोटे, अलग-थलग पड़े इलाकों में सिमट जाते हैं, तो उनका Genetic Pool तेजी से सीमित होने लगता है। सामान्य परिस्थितियों में जानवर अलग-अलग समूहों के साथ मिलकर प्रजनन करते हैं, जिससे Genetic Diversity बनी रहती है। लेकिन जब Wildlife corridors टूट जाते हैं और आवाजाही रुक जाती है, तो एक ही परिवार या सीमित समूह के भीतर बार-बार प्रजनन होता है, जिसे Inbreeding कहा जाता है।
इसका परिणाम आने वाली पीढ़ियों में शारीरिक कमजोरी, बीमारियों के प्रति कम प्रतिरोधक क्षमता और प्रजनन दर में गिरावट के रूप में सामने आता है। लंबे समय में यह प्रक्रिया पूरी प्रजाति के अस्तित्व के लिए खतरा बन सकती है, क्योंकि कमजोर पीढ़ियाँ बदलते पर्यावरण और बीमारियों का सामना नहीं कर पातीं। इस तरह प्राकृतिक आवास का टूटना केवल वर्तमान वन्यजीवों को नहीं, बल्कि उनकी आने वाली पीढ़ियों को भी संकट में डाल देता है।
जल संकट:
Aravalli Hills उत्तर भारत की प्राकृतिक जल-संचयन प्रणाली की तरह काम करती हैं। इनकी चट्टानें, मिट्टी और वनस्पति बारिश के पानी को तुरंत बह जाने से रोकती हैं और उसे धीरे-धीरे जमीन के अंदर रिसने का मौका देती हैं, जिससे Groundwater Recharge लगातार होता रहता है।
यही प्रक्रिया आसपास के इलाकों में कुओं, हैंडपंपों और बोरवेल्स को जीवित रखती है। लेकिन अगर Aravalli का बड़े पैमाने पर विनाश होता है, तो बारिश का पानी बिना रुके सतह पर बह जाएगा—नतीजतन एक तरफ बाढ़ की घटनाएँ बढ़ेंगी, और दूसरी तरफ कुछ ही समय में सूखे की स्थिति पैदा हो जाएगी।
Water Table भी तेजी से नीचे गिरेगा, जिससे Delhi-NCR, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे पहले से जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों में पीने के पानी और खेती दोनों पर गहरा असर पड़ेगा। यह संकट केवल मौसमी नहीं, बल्कि लंबे समय तक चलने वाला संरचनात्मक जल संकट बन सकता है।
तापमान असंतुलन:
Aravalli Hills तापमान को नियंत्रित रखने वाली एक प्राकृतिक जलवायु-संतुलन प्रणाली की तरह काम करती हैं। इनकी वनस्पति, मिट्टी और नमी दिन की गर्मी को सोखकर धीरे-धीरे छोड़ती है, जिससे दिन–रात और मौसमों के तापमान में संतुलन बना रहता है। लेकिन जब यह प्रणाली कमजोर होती है या नष्ट कर दी जाती है, तो जमीन और चट्टानें दिन में अत्यधिक गर्म हो जाती हैं और रात में तेजी से ठंडी पड़ जाती हैं।
इसका नतीजा यह होता है कि दिन और रात के तापमान में अत्यधिक अंतर देखने को मिलता है, साथ ही मौसम भी अधिक अनिश्चित और चरम (Extreme) हो जाता है। गर्मियों में तीव्र हीटवेव, सर्दियों में अचानक ठंड, और मानसून में असामान्य व्यवहार जैसे बदलाव आम हो सकते हैं। यह तापमान असंतुलन न केवल मानव स्वास्थ्य पर असर डालता है, बल्कि कृषि, जल संसाधनों और पूरे Ecosystem की स्थिरता को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
Man–Animal Conflict:
जब पहाड़ियों और जंगलों में Mining और Habitat Destruction के कारण वन्यजीवों का प्राकृतिक क्षेत्र सिकुड़ता है, तो जानवरों के पास मानव बस्तियों की ओर बढ़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। भोजन, पानी और सुरक्षित आवास की तलाश में वे खेतों, गाँवों और शहरी इलाकों में घुसने लगते हैं। इसका नतीजा होता है मानव–वन्यजीव टकराव, जिसमें फसलें नष्ट होती हैं, पशुधन को नुकसान पहुँचता है और कई बार इंसानी जान भी खतरे में पड़ जाती है।
दूसरी ओर, डर और असुरक्षा के माहौल में जानवर भी घायल होते हैं या मारे जाते हैं। यह संघर्ष किसी एक घटना तक सीमित नहीं रहता, बल्कि धीरे-धीरे एक स्थायी सामाजिक और पर्यावरणीय समस्या बन जाता है, जो न तो मानव के लिए सुरक्षित है और न ही वन्यजीवों के अस्तित्व के लिए।
खेती पर असर:
Aravalli Hills उत्तर भारत की कृषि के लिए एक प्राकृतिक सहायक प्रणाली की तरह काम करती हैं। ये पहाड़ियाँ वर्षा के पानी को रोककर Soil Moisture बनाए रखने और भूजल को धीरे-धीरे Recharge करने में मदद करती हैं, जिसका सीधा लाभ Kharif और Rabi दोनों फसलों को मिलता है। लेकिन अगर Aravalli का बड़े पैमाने पर क्षरण होता है, तो मिट्टी में नमी तेजी से खत्म होगी और सिंचाई के स्रोत कमजोर पड़ेंगे।
इसका असर फसलों की जड़ों पर पड़ेगा, जिससे उपज घटेगी और किसानों की लागत बढ़ेगी। अनियमित बारिश, बढ़ता तापमान और जल संकट मिलकर खेती को और अधिक अस्थिर बना देंगे। लंबे समय में यह स्थिति खाद्य सुरक्षा पर भी असर डाल सकती है, जहाँ उत्पादन घटने के साथ-साथ किसानों की आजीविका और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों खतरे में आ जाएँगी।
खनन करने वाले, नीतियाँ बनाने वाले और ताकतवर लोग शायद मोटा मुनाफा कमाकर बेहतर AQI वाले शहरों या देशों में अपने बच्चों के साथ आराम से बस जाएँगे। लेकिन Aravalli Hills के विनाश की कीमत उन्हें नहीं, बल्कि भारत की आम जनता को चुकानी पड़ेगी—जो इसी जहरीली होती हवा में साँस लेती है, इसी कमजोर होती जमीन पर खेती करती है और इसी सूखते पानी पर निर्भर है। Aravalli Hills को खत्म करना केवल पहाड़ियों को खोना नहीं है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों से उनका सुरक्षित जीवन छीन लेना है। सवाल यह नहीं है कि खनन से आज कितना पैसा बनेगा, बल्कि यह है कि क्या हम आने वाले कल के लिए कुछ बचा भी पाएँगे?
Aravalli Hills से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs):
प्रश्न: Aravalli Hills कहाँ स्थित हैं?
उत्तर: Aravalli Hills भारत के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित हैं। यह पर्वतमाला गुजरात से शुरू होकर राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली से गुजरती हुई समाप्त होती है।
प्रश्न: Aravalli Hills क्यों प्रसिद्ध हैं?
उत्तर: Aravalli Hills दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में से एक होने के लिए प्रसिद्ध हैं। ये थार मरुस्थल को फैलने से रोकने, जलवायु संतुलन बनाए रखने, भूजल को संतुलित रखने और जैव विविधता संरक्षण में अहम भूमिका निभाती हैं।
प्रश्न: Aravalli Hills से जुड़ा मुख्य मुद्दा क्या है?
उत्तर: मुख्य मुद्दे हैं अवैध खनन, वनों की कटाई, शहरीकरण और नया सरकारी वर्गीकरण, जिनसे Aravalli का बड़ा हिस्सा पर्यावरणीय सुरक्षा से बाहर हो सकता है।
प्रश्न: Aravalli का सबसे ऊँचा शिखर कौन-सा है?
उत्तर: Aravalli का सबसे ऊँचा शिखर गुरु शिखर (Guru Shikhar) है, जो माउंट आबू (राजस्थान) में स्थित है। इसकी ऊँचाई लगभग 1,722 मीटर है।
प्रश्न: Aravalli घूमने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?
उत्तर: Aravalli Hills घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच होता है।
प्रश्न: कौन-सी पर्वतमाला पुरानी है — Himalayas या Aravalli?
उत्तर: Aravalli Hills, Himalayas से कहीं ज्यादा पुरानी हैं। Aravalli की आयु लगभग 1.5 से 2.5 अरब वर्ष मानी जाती है, जबकि Himalayas अपेक्षाकृत नई पर्वतमाला हैं।
प्रश्न: दिल्ली में Ridge कहाँ स्थित है?
उत्तर: दिल्ली की Ridge, Aravalli Hills का ही एक हिस्सा है और यह उत्तर दिल्ली, मध्य दिल्ली, दक्षिण दिल्ली और दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में फैली हुई है।
प्रश्न: राजस्थान में Aravalli की लंबाई कितनी है?
उत्तर: Aravalli Range का सबसे बड़ा हिस्सा राजस्थान में स्थित है। कुल लंबाई लगभग 670–800 किलोमीटर मानी जाती है।
प्रश्न: कौन-सी नदी Aravalli से निकलती है?
उत्तर: बनास नदी, साबरमती नदी और लूनी नदी का उद्गम Aravalli Range से माना जाता है।
प्रश्न: Aravalli Hills में कौन-सा National Park है?
उत्तर: सरिस्का टाइगर रिजर्व (राजस्थान) Aravalli Hills में स्थित एक प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान है।
प्रश्न: दिल्ली के “Green Lungs” क्या हैं?
उत्तर: Aravalli Ridge, Sanjay Van, Asola Bhatti Wildlife Sanctuary को दिल्ली के “Green Lungs” कहा जाता है, क्योंकि ये प्रदूषण कम करने में मदद करते हैं।
प्रश्न: दिल्ली के “Green Lungs” क्या हैं?
उत्तर: Mount Abu Aravalli Range का सबसे प्रसिद्ध Hill Station है।
प्रश्न: क्या Aravalli एक Fold Mountain है?
उत्तर: हाँ, Aravalli पर्वतमाला Fold Mountains ही हैं और ये दुनिया की सबसे प्राचीन Fold Mountains मानी जाती हैं। इनका निर्माण करोड़ों वर्ष पहले Plate Tectonic Movements के कारण हुआ था। समय के साथ-साथ लगातार Erosion (कटाव), मौसम और भूगर्भीय प्रक्रियाओं की वजह से इनका मूल Folded स्वरूप काफी हद तक घिस चुका है। इसी कारण आज Aravalli की ऊँचाई कम दिखाई देती है और ये Himalayas जैसी तेज, ऊँची Fold Mountains जैसी नहीं लगतीं।
प्रश्न: क्या दिल्ली में Aravalli Hills मौजूद हैं?
उत्तर: हाँ, दिल्ली में Aravalli Hills का हिस्सा मौजूद है, जिसे आमतौर पर Delhi Ridge कहा जाता है।
प्रश्न: Aravalli कितने राज्यों से होकर गुजरती है?
उत्तर: Aravalli Hills 3 राज्यों (गुजरात, राजस्थान, हरियाणा) और 1 केंद्र शासित प्रदेश (दिल्ली) से होकर गुजरती हैं।
प्रश्न: भारत की सबसे नई पर्वतमाला कौन-सी है?
उत्तर: भारत की सबसे नई पर्वतमाला Himalayas है।
प्रश्न: Aravalli Range और Himalayas में क्या अंतर है?
उत्तर: Aravalli और Himalayas में कई बड़े अंतर हैं। Aravalli बेहद पुरानी, कम ऊँचाई वाली और Erosion से घिसी हुई पर्वतमाला है, जबकि Himalayas अपेक्षाकृत नई, बहुत ऊँची और आज भी Tectonic गतिविधियों के कारण बढ़ रही पर्वतमाला हैं। Aravalli जलवायु संतुलन और मरुस्थलीकरण रोकने में अहम भूमिका निभाती है, जबकि Himalayas कई छोटी-बड़ी नदियों के स्रोत के रूप में ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।