G20 Summit 2025: Johannesburg में ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन।

G20 आज की दुनिया का बहुत प्रभावशाली बहुपक्षीय वैश्विक मंच है, जो न केवल ऊर्जा और पर्यावरण जैसे विषयों पर निर्णय लेता है, बल्कि जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य, डिजिटल तकनीक, वैश्विक व्यापार, गरीबी उन्मूलन और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता जैसे आधुनिक युग के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा का प्रमुख माध्यम बन चुका है। यह संगठन दुनिया की लगभग 85% GDP, 75% अंतरराष्ट्रीय व्यापार और लगभग 66% आबादी का प्रतिनिधित्व करता है।

G20 Summit 2025 विशेष रूप से ऐतिहासिक होने वाला है, क्योंकि यह पहली बार अफ्रीकी महाद्वीप पर, दक्षिण अफ्रीका के Johannesburg में आयोजित किया जा रहा है। यह न सिर्फ राजनीति और अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि Global South की आवाज को दुनिया के केंद्र में लाने का एक बड़ा अवसर भी है।

G20 Summit 2025 और पहले की कहानी:

G20 की स्थापना 1999 में एशियाई वित्तीय संकट के बाद हुई, जब यह महसूस किया गया कि सिर्फ विकसित देशों के समूह (G7) से वैश्विक आर्थिक चुनौतियाँ हल नहीं हो सकतीं। दुनिया को एक ऐसे मंच की आवश्यकता थी जिसमें विकसित देशों के साथ उभरती अर्थव्यवस्थाएँ भी शामिल हों। शुरुआत में G20 केवल वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के प्रमुखों का समूह था। लेकिन 2008 के वैश्विक आर्थिक संकट ने साबित कर दिया कि विश्व अर्थव्यवस्था पर सामूहिक निर्णय लिए बिना स्थिरता संभव नहीं है।

समय के साथ, इसका क्षेत्र सिर्फ वित्तीय स्थिरता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें जलवायु परिवर्तन, वैश्विक स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, डिजिटल गवर्नेंस, ऊर्जा नीति और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों पर संवाद जैसे विषय भी शामिल हो गए।

World leaders group photo during G20 Summit 2025, posing together at Johannesburg global summit meeting-Representational Image
Representational image of world leaders posing for a group photo at the G20 Summit 2025 in Johannesburg.

G20 के सदस्य देश:

G20 में कुल 19 देश और एक यूरोपीय संघ शामिल हैं, इनमें विकसित और विकासशील दोनों प्रकार के देश शामिल हैं, जिससे यह समूह एक संतुलित वैश्विक आर्थिक प्रतिनिधित्व प्रदान करता है। G20 के सदस्य देश हैं — अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, दक्षिण कोरिया, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्किये, ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ।

G20 की खासियत यह है कि इसमें केवल आर्थिक रूप से शक्तिशाली देश ही नहीं, बल्कि उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएँ भी शामिल हैं, जैसे भारत, ब्राजील, इंडोनेशिया और दक्षिण अफ्रीका। इससे Global North और Global South के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा मिलता है। इसी व्यापक प्रतिनिधित्व के कारण G20 को दुनिया की सबसे प्रभावशाली आर्थिक नीति-निर्माण संस्था माना जाता है।

G20 Summit और इसकी कार्य प्रणाली:

G20 की कोई स्थायी इमारत या मुख्यालय नहीं होता, बल्कि हर साल एक सदस्य देश इसकी अध्यक्षता करता है और उसी देश के एजेंडा के आधार पर साल भर बैठकें और चर्चाएँ होती हैं। इसका कार्य दो प्रमुख ट्रैकों — Sherpa Track और Finance Track के माध्यम से चलता है।

Sherpa Track में सामाजिक, पर्यावरण, जलवायु, विकास और मानवाधिकार जैसे मुद्दों पर चर्चा होती है, जबकि Finance Track में वैश्विक ऋण संकट, मुद्रास्फीति, व्यापार, निवेश, बैंकिंग प्रणाली, डिजिटल करेंसी और Taxation Policies जैसे विषय आते हैं। इसके अलावा Y20(Youth), W20(Women), C20(Civil Society), B20(Business), और S20(Science) जैसे Engagement Groups अलग-अलग वर्गों की आवाज G20 तक पहुँचाते हैं।

G20 Summit 2025 – Johannesburg क्यों ऐतिहासिक है?

2025 का G20 Summit कई कारणों से ऐतिहासिक होने जा रहा है। सबसे पहले, यह पहली बार अफ्रीका महाद्वीप में आयोजित होगा, जो Global South की उभरती ताकत और अफ्रीकी देशों की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। इस बार गरीबी, ऋण संकट, स्वास्थ्य असमानता, Digital Inclusion, Climate Justice और Food Security जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी जो विशेष रूप से विकासशील और गरीब देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

इसके अलावा, इस सम्मेलन में संभव है कि UN Security Council जैसी संस्थाओं में सुधार की माँग को बड़े पैमाने पर उठाया जाए। अफ्रीकी देशों की Permanent Representation और BRICS विस्तार भी चर्चा के महत्वपूर्ण विषय हो सकते हैं।

G20 Summit 2025 की थीम और मुख्य एजेंडा:

इस बार G20 Summit 2025 की थीम एकजुटता, समानता, स्थिरता है। लेकिन अनुमान है कि इस बार का मुख्य फोकस Digital Public Infrastructure, Green Energy Transition, AI Governance, Debt Relief for Developing Nations, और Climate Justice पर होगा।

साथ ही Global South को Decision-Making प्रक्रिया में अधिक हिस्सेदारी दिलाना, Health Partnerships बनाना और Digital Divide को कम करना भी मुख्य लक्ष्य हो सकते हैं। Peace Diplomacy के तहत यूक्रेन युद्ध, Gaza-Israel संकट और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में तनाव को कम करना भी महत्वपूर्ण एजेंडा का हिस्सा हो सकते हैं।

Illustration of G20 leaders sitting around a round table in an international meeting setting, discussing global cooperation and policy issues.
A representational illustration showing G20 leaders engaged in a round-table discussion on global cooperation and policy dialogue.

G20 Summit का महत्व और वैश्विक भूमिका:

G20 आज सिर्फ एक समूह ही नहीं, बल्कि Global Governance का अनौपचारिक नेतृत्वकर्ता बन चुका है। यह वैश्विक नीतियों को आकार देने, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार सुझाने और देशों के बीच संवाद का पुल बनाने का काम करता है। जलवायु संकट, महामारी प्रबंधन, डेटा सुरक्षा, Food Supply Chain और क्षेत्रीय संघर्षों जैसे मुद्दों पर G20 के निर्णयों का व्यापक प्रभाव पड़ता है। विश्व की बड़ी शक्तियाँ — जैसे अमेरिका, चीन, यूरोपीय संघ, भारत और रूस एक ही मंच पर आकर बातचीत करती हैं और यही G20 की सबसे बड़ी ताकत है।

G20 Summit 2025 और भारत का दृष्टिकोण:

भारत 2008 से G20 का सक्रिय सदस्य रहा है, लेकिन 2023 में भारत की अध्यक्षता ने G20 को एक नई दिशा दी। “Vasudhaiva Kutumbakam — One Earth, One Family, One Future” का भारतीय संदेश पूरी दुनिया ने अपनाया। भारत ने Digital Public Infrastructure, UPI, Aadhaar Model, Solar Alliance और Vaccine Maitri जैसे विचारों को वैश्विक मंच पर सफलतापूर्वक प्रस्तुत किया। 2025 में भारत की भूमिका एक मार्गदर्शक की हो सकती है, जो अफ्रीकी देशों और विकासशील दुनिया के लिए तकनीक, शिक्षा, स्वास्थ्य और Digital Partnerships में सहयोग को बढ़ावा दे सके।

G20 Summit 2025 वर्तमान प्रासंगिकता:

आज की दुनिया अनेक संकटों से गुजर रही है — आर्थिक मंदी, युद्ध, जलवायु आपदाएँ, स्वास्थ्य असमानता, तकनीकी नियंत्रण और वैश्विक नेतृत्व की कमी। ऐसे समय में G20 की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। Global South की आवाज पहले कभी इतनी मजबूत नहीं थी और अफ्रीका में होने वाला ये G20 Summit इसे और अधिक सशक्त बना सकता है। यह सम्मेलन न केवल नीतिगत निर्णयों का केंद्र होगा बल्कि दुनिया के भविष्य की दिशा तय करने का महत्वपूर्ण मंच भी साबित हो सकता है।

वैश्विक आर्थिक सहयोग की बात करें तो केवल G20 ही नहीं, बल्कि BRICS भी दुनिया का एक प्रभावशाली समूह माना जाता है, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि 2025 का G20 Summit भी दक्षिण अफ्रीका में हो रहा है, जो BRICS का भी सदस्य देश है। दोनों समूह उभरती अर्थव्यवस्थाओं, वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। अगर आप जानना चाहते हैं कि BRICS कैसे दुनिया की शक्ति-संतुलन को बदल रहा है, तो हमारा यह विस्तृत लेख जरूर पढ़ें —

                                         BRICS और BHARAT: बदलती दुनिया का शक्ति संतुलन।

G20 आज सिर्फ देशों का समूह नहीं बल्कि एक नई वैश्विक व्यवस्था बनाने वाला मंच बन चुका है। 2025 का जोहान्सबर्ग शिखर सम्मेलन एक ऐसी घड़ी में आयोजित हो रहा है जब दुनिया समावेशी, संतुलित और न्यायपूर्ण भविष्य की खोज में है। यह सम्मेलन अफ्रीका, भारत और पूरे Global South के लिए अवसर लेकर आया है कि वे मिलकर एक अधिक मानवीय, सहयोगपूर्ण और टिकाऊ विश्व व्यवस्था का निर्माण करें।

 

 

 

 

 

 

 

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